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American Sanction on Iran Port : अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर लगे प्रतिबंधों की ढील को साल के आखिर तक बढ़ा दिया है. पहले यह छूट सिर्फ 28 अक्टूबर तक थी.
नई दिल्ली. ग्लोबल मार्केट में इस समय काफी कुछ घट रहा है. एक तरफ तो भारत अपने ऊपर लगे टैरिफ को कम कराने की जुगत कर रहा है तो दूसरी ओर ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह को लेकर हुए 10 साल पुराने करार पर अमेरिकी प्रतिबंध से बचने की कोशिश में जुटा है. लेकिन, ऐसा लग रहा है कि दोनों ही मोर्चे पर भारत को एकसाथ खुशखबरी मिल सकती है. एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह भारत के साथ ट्रेड डील करने को तैयार हैं और अब अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंध में दी गई ढील का दायरा भी बढ़ा दिया है.
कई दिनों से चल रही बातचीत
इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार, भारत कई दिनों से अमेरिका के साथ सइ मुद्दे पर बातचीत कर रहा था, क्योंकि उसने न सिर्फ ईरान के इस बंदरगाह को विकसित करने में मोटा निवेश किया है, बल्कि यह रास्ता उसके यूरोप और रूस से माल ढुलाई को भी आसान बनाता है. अमेरिका ने पहले इस बंदरगाह पर 29 सितंबर तक प्रतिबंध लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 28 अक्टूबर कर दिया गया था. अब इसपर प्रतिबंधों से छूट को 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दिया गया है.
भारत ने किया था 10 साल का करार
भारत ने 13 मई, 2024 को ईरान के चाबहार बंदरगाह को संचालित करने के लिए 10 साल का अनुबंध किया था. यह समझौता भारतीय पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के बीच हुआ था. चाबहार बंदरगाह भारत-अफगानिस्तान आर्थिक साझेदारी और मानवीय सहायता की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें एम्बुलेंस सर्विस भी शामिल है. अफगानिस्तान का तालिबान शासन भी अपनी वैश्विक पहुंच के लिए चाबहार बंदरगाह के प्रभावी उपयोग में रुचि दिखा रहा है.
भारत के लिए गलियारा बनाता है यह बंदरगाह
भारत और ईरान ने चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और मध्य एशियाई देशों से जोड़ने की योजना है. भारत का मध्य एशियाई साझेदार उज्बेकिस्तान सिर्फ चीन के आर्थिक गलियारे पर निर्भर नहीं रहना चाहता और ईरान का चाबहार बंदरगाह उसके लिए अच्छे विकलप के रूप में सामने आ सकता है. रूस भी इस बंदरगाह का इस्तेमाल करके कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते भारत और अन्य एशियाई देशों के साथ व्यापार करने की रणनीति पर काम कर रहा है. हालांकि, अमेरिका ने इस पर प्रतिबंध लगाकर भारत सहित तमाम देशों को एकसाथ झटका देने की कोशिश की है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

