राम मंदिर में चढ़ावे में कथित धांधली के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है। केजरीवाल ने कहा कि इस बात के सबूत नहीं है कि पैसा पीएम नरेंद्र मोदी तक पहुंचा, लेकिन उन्होंने लीपा-पोती और दोषियों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने पीएम मोदी का नाम लेकर कई सवाल दागे और पूछा कि इतने लंबे समय तक हुई चोरी का उन्हें पता कैसे नहीं लगा? पूर्व सीएम ने यह भी जानना चाहा कि किस मजबूरी के तहत दोषियों को बचाया जा रहा है। ‘दोषियों को बचाने की हुई कोशिश’ केजरीवाल ने कहा कि अब यह माना जा रहा है कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले के असली और प्रभावशाली दोषियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग लगातार दावा कर रहे हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी किसी भी दोषी को नहीं छोड़ेंगे, लेकिन उन्होंने जनता से पूछा कि क्या वास्तव में लोगों को इस बात पर भरोसा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि चोरी का पैसा पीएम नरेंद्र मोदी तक पहुंचा। इसलिए वह इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर ट्रस्ट का गठन पीएम नरेंद्र मोदी की निगरानी में हुआ था और ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों का चयन भी उन्हीं की ओर से किया गया था, इसलिए सरकार इस मामले से खुद को अलग नहीं कर सकती। 2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ में बिकने का दावा पूर्व सीएम ने अपने बयान में वर्ष 2021 में सामने आए कथित जमीन खरीद मामलों को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट ने कई जमीनें बाजार कीमत से कहीं अधिक दाम पर खरीदीं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक जमीन पहले दो करोड़ रुपए में खरीदी गई और कुछ ही मिनट बाद वही जमीन 18 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेच दी गई। इसी तरह अन्य जमीनों की खरीद में भी कथित रूप से कई गुना अधिक कीमत चुकाई गई। उन्होंने दावा किया कि कुल 14 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन लगभग 95 करोड़ रुपए में खरीदी गई। उन्होंने कहा कि इन सौदों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और उस समय यह मामला मीडिया में भी चर्चा का विषय बना था। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण कार्य में लगे कुछ इंजीनियरों ने टेंडर प्रक्रिया में 40 प्रतिशत कमीशन मांगे जाने की शिकायत की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कई बार चोरी की घटनाएं दर्ज हुईं और बाद में कई महीनों की फुटेज भी कथित रूप से हटा दी गई। ‘छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े जिम्मेदार बाहर’ अपने संबोधन में केजरीवाल ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला अधिक चर्चा में आया तो सरकार ने लोगों को संतुष्ट करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, लेकिन यह जांच केवल चढ़ावे से जुड़े मामले तक सीमित रखी गई। उनके अनुसार, जमीन खरीद और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तार किए गए 8 लोग केवल छोटे कर्मचारी हैं और असली जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंची। उनका आरोप था कि इन आरोपियों से पुलिस ने पर्याप्त पूछताछ भी नहीं की और उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे पहले वर्ष 2021 में जमीन खरीद मामलों की जांच के लिए बनी एसआईटी की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई और उस मामले में किसी के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। ‘चढ़ावा, जमीन और निर्माण सभी की हो जांच’ केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पदों से इस्तीफा दिया है, वे आज भी मंदिर के कामकाज में प्रभाव रखते हैं। साथ ही उन्होंने कुछ सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस मामले में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहकर सभी संबंधित पहलुओं, जैसे चढ़ावे, जमीन खरीद और निर्माण कार्यों की भी होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
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