आज वर्ल्ड म्यूजियम डे है। म्यूजियम में रखे सभी आर्टिफैक्ट्स सिर्फ पुरानी चीजों को रखने भर की जगह नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवित कहानियां हैं, जो हमें हमारे शहर और देश के इतिहास से रूबरू करवाती हैं। इस खास अवसर पर भास्कर ने 94.3 माय एफएम के आरजे कार्तिक और राजस्थान आर्कियोलॉजी विभाग की जॉइंट डायरेक्टर कृष्णकांता शर्मा के साथ म्यूजियम को अलग नजरिए, रोचक पहलू, अनसुने और हिडन फैक्ट्स देखते-सुनते हुए विजिट किया। आर्कियोलॉजी के एक्सपर्ट्स ने उन तथ्यों से रूबरू करवाया, जिन्हें अक्सर विजिटर्स जान नहीं पाते। बस म्यूजियम देखकर निकल जाते हैं। वॉक थ्रू की शुरुआत कृष्णकांता ने इस म्यूजियम से जुड़े प्रमुख शख्स, ब्रिटिश सर्जन (डॉ.) थॉमस होल्बिन हेंडले सीआईई के बारे में बताते हुए की। वे एसएमएस के रेजीडेंट सर्जन थे। उनका म्यूजियम की स्थापना करने में प्रमुख योगदान रहा। वे म्यूजियम के पहले क्यूरेटर थे। 1895 में उनकी लिखी मूल किताब दिखाई, जिसमें उन्होंने म्यूजियम में प्रदर्शित सभी आर्टिफैक्ट्स की जानकारी का वर्णन किया है। यहां की तीसरी मंजिल पर मौजूद लाइब्रेरी में करीब 11 हजार किताबें हैं, जिनमें 800 दुर्लभ पुस्तकें हैं। जो इसी म्यूजियम में उपलब्ध हैं। इन्होंने इच्छुक रिसर्च स्कॉलर्स से इनकी मदद से स्टडी करने की बात भी कही। यहां सभा कक्ष में बरसों पुराना पियानो, शैंडलियर जैसे कई आर्टिफैक्ट्स भी देखने को मिले।
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