केरल में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की शानदार जीत के बाद बनने जा रही नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है. वजह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि वह सख्त प्रोटोकॉल है जिसने कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं को भी मंच से दूर कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में होने वाले इस समारोह में राहुल गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं को दर्शक दीर्घा में बैठना होगा. मंच पर सिर्फ राज्यपाल, मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए वीडी सतीशन और मंत्री ही दिखाई देंगे. ऐसे में समारोह शुरू होने से पहले ही राजनीति और प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हो गई है.
मंच पर सिर्फ चुनिंदा लोगों को इजाजत
केरल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर लोक भवन की तरफ से बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंच पर केवल राज्यपाल, मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए वीडी सतीशन और शपथ लेने वाले मंत्री ही मौजूद रहेंगे. इसके अलावा किसी भी नेता या विशेष अतिथि को मंच पर बैठने की अनुमति नहीं होगी. यही कारण है कि राहुल गांधी जैसे बड़े चेहरे भी आम अतिथियों की तरह दर्शक दीर्घा में बैठेंगे. इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है.
राहुल, खड़गे और प्रियंका रहेंगे मौजूद
हालांकि मंच पर जगह नहीं मिलेगी, लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेता इस समारोह में शामिल होने वाले हैं. जानकारी के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समारोह में पहुंचेंगे. इसके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं. कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के आने की भी चर्चा है. लेकिन प्रोटोकॉल के कारण कोई भी नेता मंच साझा नहीं करेगा. कांग्रेस के भीतर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं.
UDF की ऐतिहासिक जीत ने बदला माहौल
केरल विधानसभा चुनाव में UDF ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है. कांग्रेस नीत गठबंधन ने 140 में से 102 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की. इस बड़ी जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है. यही वजह है कि शपथ ग्रहण समारोह को भी ऐतिहासिक बनाने की तैयारी की गई है. तिरुवनंतपुरम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह जीत केरल की राजनीति में कांग्रेस के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकती है.
12 हजार से बढ़ाकर 50 हजार की व्यवस्था
पहले समारोह के लिए करीब 12 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए क्षमता को बढ़ाकर लगभग 50 हजार कर दिया गया. सेंट्रल स्टेडियम में विशाल पंडाल तैयार किया गया है. अलग-अलग जगहों पर बड़ी LED स्क्रीन भी लगाई जा रही हैं ताकि दूर बैठे लोग भी समारोह को आसानी से देख सकें. खास मेहमानों के लिए अलग गैलरी और विशेष व्यवस्था भी की गई है. प्रशासन को उम्मीद है कि हजारों की संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.
तिरुवनंतपुरम में ट्रैफिक पर असर तय
शपथ ग्रहण समारोह की वजह से सोमवार को तिरुवनंतपुरम के कई इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित रहने वाली है. प्रशासन ने पहले ही लोगों को एडवाइजरी जारी कर दी है. भारी भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए कई रास्तों पर डायवर्जन किया जाएगा. पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार तैयारी में जुटी हुई हैं. सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं. सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन जैसा आयोजन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सरकार गठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए बड़ा शक्ति प्रदर्शन भी है. लंबे समय बाद केरल में इतनी बड़ी जीत ने पार्टी को नई ऊर्जा दी है. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम बना रही है. हालांकि मंच पर जगह न मिलने का मुद्दा भी चर्चा का विषय बना हुआ है. इससे यह संदेश देने की कोशिश दिख रही है कि कार्यक्रम पूरी तरह संवैधानिक प्रोटोकॉल के तहत आयोजित किया जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पहले मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आई. News18 और Mathrubhumi की रिपोर्ट में बताया गया कि लोक भवन ने मंच को लेकर सख्त नियम तय किए हैं. इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल होने लगा. कई लोग इसे अनुशासन और प्रोटोकॉल से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक संदेश मान रहे हैं. फिलहाल सबकी नजर सोमवार को होने वाले इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई है.

