Friday, April 10, 2026
Homeदेशइलाज के नाम पर किडनी का धंधा, गरीबों को लूटा... दो बड़े...

इलाज के नाम पर किडनी का धंधा, गरीबों को लूटा… दो बड़े अस्पतालों पर लगा ताला


तमिलनाडु सरकार ने किडनी ट्रांसप्लांट घोटाले में फंसे दो बड़े प्राइवेट अस्पतालों के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं. ये मामला नमक्कल जिले में सामने आया था, जहां एक बड़े किडनी रैकेट का खुलासा हुआ. जांच में कई अनियमितताएं और गैरकानूनी काम पकड़े गए.

गरीबों को फंसाकर बिकवाई जा रही थी किडनी
मामला तब सामने आया जब पुलिस और हेल्थ डिपार्टमेंट को शिकायत मिली कि कुछ बिचौलिए, पल्लिपालयम और आसपास के इलाकों में गरीब और मजबूर लोगों को पैसे के लालच में किडनी बेचने के लिए तैयार कर रहे हैं. आरोप है कि इन लोगों पर दबाव डालकर किडनी बिकवाई जा रही थी.

हेल्थ मिनिस्टर ने बनाई स्पेशल जांच टीम
जैसे ही मामला सामने आया, तमिलनाडु के हेल्थ मिनिस्टर मा सुब्रमण्यम ने पूरी जांच के आदेश दिए. इसके लिए एक पैनल बनाया गया, जिसकी अगुवाई एस. वीनीत, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, TN हेल्थ सिस्टम रिफॉर्म प्रोग्राम ने की.

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
रविवार को आई इस जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पेराम्बलूर का धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और तिरुची का सेथर हॉस्पिटल, दोनों ने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट, 1994 का उल्लंघन किया.

रिपोर्ट में बताया गया कि इन अस्पतालों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करवा कर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए गैरकानूनी मंजूरी ली. बिचौलियों ने पैसों के बदले किडनी खरीदीं और फिर ट्रांसप्लांट कराया.

लाइसेंस रद्द, FIR भी दर्ज
पहले दोनों अस्पतालों का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था, लेकिन अब रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने इन्हें स्थायी रूप से रद्द करने का फैसला कर लिया है. इसके लिए डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एंड रूरल हेल्थ सर्विसेज कार्रवाई करेगा.

साथ ही, पुलिस ने बिचौलिए आनंदन और स्टेनली मोहन के खिलाफ FIR दर्ज कर दी है. बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड्स से इनके खिलाफ सबूत मिले हैं.

बनेगी राज्य स्तरीय निगरानी कमेटी
जांच रिपोर्ट में एक और अहम सुझाव दिया गया कि राज्य स्तर पर एक निगरानी कमेटी बनाई जाए, जो चार जिला स्तरीय ऑथराइजेशन कमेटियों के कामकाज पर नजर रखे. सरकार ने इसे मान लिया है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी पहचान की पुष्टि
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किडनी देने वाले और लेने वाले की पहचान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जाए. इससे किसी को धोखे में किडनी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा. साथ ही, सभी मेडिकल और लीगल डॉक्यूमेंट्स को कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखा जाएगा. सरकार ने तय किया है कि ट्रांसप्लांट से जुड़े सभी अस्पतालों की नियमित जांच होगी और अगर कोई गड़बड़ी मिली तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments