गरीबों को फंसाकर बिकवाई जा रही थी किडनी
मामला तब सामने आया जब पुलिस और हेल्थ डिपार्टमेंट को शिकायत मिली कि कुछ बिचौलिए, पल्लिपालयम और आसपास के इलाकों में गरीब और मजबूर लोगों को पैसे के लालच में किडनी बेचने के लिए तैयार कर रहे हैं. आरोप है कि इन लोगों पर दबाव डालकर किडनी बिकवाई जा रही थी.
जैसे ही मामला सामने आया, तमिलनाडु के हेल्थ मिनिस्टर मा सुब्रमण्यम ने पूरी जांच के आदेश दिए. इसके लिए एक पैनल बनाया गया, जिसकी अगुवाई एस. वीनीत, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, TN हेल्थ सिस्टम रिफॉर्म प्रोग्राम ने की.
जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
रविवार को आई इस जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पेराम्बलूर का धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और तिरुची का सेथर हॉस्पिटल, दोनों ने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट, 1994 का उल्लंघन किया.
लाइसेंस रद्द, FIR भी दर्ज
पहले दोनों अस्पतालों का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था, लेकिन अब रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने इन्हें स्थायी रूप से रद्द करने का फैसला कर लिया है. इसके लिए डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एंड रूरल हेल्थ सर्विसेज कार्रवाई करेगा.
बनेगी राज्य स्तरीय निगरानी कमेटी
जांच रिपोर्ट में एक और अहम सुझाव दिया गया कि राज्य स्तर पर एक निगरानी कमेटी बनाई जाए, जो चार जिला स्तरीय ऑथराइजेशन कमेटियों के कामकाज पर नजर रखे. सरकार ने इसे मान लिया है.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी पहचान की पुष्टि
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किडनी देने वाले और लेने वाले की पहचान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की जाए. इससे किसी को धोखे में किडनी देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा. साथ ही, सभी मेडिकल और लीगल डॉक्यूमेंट्स को कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखा जाएगा. सरकार ने तय किया है कि ट्रांसप्लांट से जुड़े सभी अस्पतालों की नियमित जांच होगी और अगर कोई गड़बड़ी मिली तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

