अभिजीत सिंह | गोरखपुर1 मिनट पहले
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गोरखपुर के न्यू कॉलोनी चिलमापुर में देर शाम ईद मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धार्मिक आयोजकों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफिज रहमत अली निजामी ने की, जिससे माहौल आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण बन गया। इसके बाद नात-ए-पाक का पाठ सद्दाम हुसैन ने प्रस्तुत किया, जिसने सभी उपस्थितों के दिलों को मोह लिया।
बदलाव से ही बदलेंगे हालात
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस रजवी ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक हम स्वयं में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक हमारे हालात में सुधार नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जात से खुद को जोड़ना, सहाबा किराम वाला दीनी जज्बा विकसित करना और कुरआन-ए-पाक व हदीस-ए-पाक पर मुकम्मल अमल करना हर मुसलमान के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को बुराईयों से दूर रहना चाहिए, दूसरों के दुख-दर्द में शरीक होना चाहिए और सुन्नत पर चलना चाहिए। फर्ज की अदायगी समय पर करना, ज्ञान प्राप्त करना और अच्छे आचरण को अपनाना जीवन को प्रकाशमय बनाता है।
पैगंबर-ए-इस्लाम के आदर्श- शिक्षाएं
करी अनस रजवी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम पूरे मानव समाज के लिए आदर्श हैं। अल्लाह ने उन्हें रहमत बना कर भेजा और उनका हर पैगाम दुनिया वालों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सिर्फ नाम से मुसलमान नहीं बनना चाहिए, बल्कि अपने अमल और किरदार से पैगंबर-ए-इस्लाम के वफादार बनना चाहिए। बच्चों को हर हाल में पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत और शिक्षाएं बताना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी भी उनके रास्ते पर चल सके।
संगोष्ठी का समापन दरूदो सलाम के साथ हुआ। इसके बाद देश की तरक्की, अमन, मुहब्बत और भाईचारे की दुआ मांगी गई। संगोष्ठी में अब्दुल अहद, सलमान, पप्पू, इमरान, औसाफ, खालिद, समीर, सोनू सहित तमाम स्थानीय नागरिक और धर्मगुरु मौजूद रहे।

