मेरठ में सेंट्रल मार्केट के 661/6 के कॉम्पलेक्स में बनी 22 दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया था, इसके बाद उन दुकानों का मलबा लगभग 40 दिनों बाद अब उठना शुरू हो गया है। ध्वस्तीकरण के बाद से अभी तक यह मलबा वहां ऐसे ही पड़ा था। अब बताया जा रहा है कि व्यापारिय
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ध्वस्तीकरण के दौरान सेंट्रल मार्केट का कॉम्पलेक्स
लगभग 15 लाख में बिका मलबा
स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक लगभग 15 लाख रूपये में किसी व्यक्ति द्वारा दुकानदारों से यह मलबा खरीदा गया है। व्यापारियों को दुकानों के आधार पर इसका पैसा मिलेगा। जिसके द्वारा यह ठेका लिया गया है उसने मलबा उठवाना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले इस मलबे पर ही जिन लोगों की यहां दुकानें थी उनके द्वारा दुकानों के शिफ्ट होने के बोर्ड भी लगाए गए थे।
अब एक नजर पूरे मामले पर
सेंट्रल मार्केट में भूखंड संख्या 661/6 लगभग 288 वर्ग मीटर पर बना है, जिसमें लगभग 22 कब्जेदार हैं। यह भूखंड आवास विकास परिषद के दस्तावेज के अनुसार काजीपुर के वीर सिंह को आवास के लिए आवंटित हुआ था, लेकिन विनोद अरोड़ा नाम के व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी की सहायता से यहां व्यवसायिक निर्माण कर दिया। 19 सितंबर, 1990 को आवास एवं विकास परिषद ने पहला नोटिस जारी किया था। इसके बाद लंबे समय तक पत्राचार के बाद 25 अक्टूबर को इन दुकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी जो दो दिन तक चली थी।

