शुरुआत होती है… उड़द दाल से इसे करीब 3 से 4 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखा जाता है, ताकि दाल अच्छी तरह फूल जाए और पीसने में मुलायम बने. भीगी हुई दाल को पीसकर जो गाढ़ा, सफेद और मुलायम मिश्रण बनता है, उसे यहां पीठी कहा जाता है. यही पीठी बड़ा बनाने की नींव है और यहीं से स्वाद की कहानी शुरू होती है.
तैयार मिश्रण से हथेली के आकार के बड़ा बनाए जाते हैं. गर्म तेल में डालकर करीब 10 मिनट तक धीमी आंच पर तलना जरूरी है, ताकि बड़ा बाहर से सुनहरा कुरकुरा और अंदर से मुलायम रहे. तलते समय इसकी महक इतनी लाजवाब होती है कि आसपास के लोग अपने – आप ठेले की तरफ खिंच आते हैं.
हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स, कोचिंग करने वाले युवा, रोज सुबह शाम बाजार आने वाले खरीदार और बड़े-बुजुर्ग सभी के लिए यह बड़ा एक पसंदीदा नाश्ता है. इसके हल्के मसाले और कुरकुरेपन के कारण इसे सुबह – शाम दोनों समय खाया जा सकता है. अगर आप रायपुर में नहीं हैं और इस रेसिपी को घर पर ट्राई करना चाहते हैं, तो बस उड़द दाल, प्याज, जीरा और मेथी लेकर राजू यादव का तरीका अपनाइए यकीन मानिए, आपका किचन भी डंगनिया बाजार की तरह महक उठेगा और घरवाले भी तारीफ किए बिना नहीं रहेंगे.

