खोनागोरियान पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की विशेष टीम (CST) ने राजधानी और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध पटाखा भंडारण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए कई गोदामों और फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की है। बुधवार देर रात कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे बरामद किए गए हैं और कई गोदामों को सील किया गया है। जमवारामगढ़ रोड स्थित बड़ी का बास क्षेत्र में नाई की थड़ी से सुमेल रोड जाने वाले मार्ग पर एक लाइसेंसधारी गोदाम में तय सीमा से कहीं अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिली। गोदाम का लाइसेंस 600 किलो भंडारण की अनुमति का था, लेकिन मौके पर 1,000 किलो से अधिक बारूद और पटाखे करीब 300 से ज्यादा कार्टूनों में बंद पाए गए। सीएसटी टीम ने इलेक्ट्रॉनिक कांटे से सामग्री का वजन करवाकर गोदाम को सील कर दिया। ये गोदाम स्थानिय निवासी से किराये पर लिया था। जो कि दो दुकानों में चलाया जा रहा था। मौके पर 18 दुकानें बनी हुई थी। जिनमें 2 गोदामों में चूरी और पशु आहार के काम पर किराये पर दे रखा था। लेकिन 2 दुकानों में भारी मात्रा में बारूद और पटाखे स्टोर किए हुए थे। जयसिंहपुरा थाना प्रभारी मुकेश ने बताया कि गोदाम को किराये पर लेने वाले व्यक्ति की पहचान दीपक खंडेलवाल के रूप में हुई है। इनकी दुकान जयपुर के चांदी की टकसाल स्थित भारतीय पटाखा शॉप के रुप में हुई है। बड़ी का बास क्षेत्र में नाई की थड़ी से सुमेल रोड जाने वाले मार्ग पर इनके लाइसेंसधारी गोदाम में 1000 किलों से ज्यादा पटाखे और उससे संबंधित सामान मिलने पर उसे सील किया गया है। इसी क्षेत्र में एलएन मित्तल कॉलेज से करीब 300 मीटर पहले सुमेल रोड पर पूर्णिमा नामक संचालक के दो गोदाम और कारखाने भी मिले। गोदाम संचालक अनिल अग्रवाल ने 1,500-1,500 किलो के लाइसेंस होने का दावा किया, उन्होंने झूठ कॉलेज से महज 300 मीटर की दूरी होने के बावजूद कहा कि गोदाम कॉलेज से डेढ़ किलोमीटर दूर है। गोदाम संचालक ने ये तक कहा कि खोनागोरियान में जहां हादसा हुआ वो लोग तो फैक्ट्री वाले थे। हम तो स्टॉक कर रहे है। हम तो खाली पटाखे बेचते है। उन्होंने बताया कि उनके गोदाम में फिलहाल 600 से 700 किलो पटाखे है। उन्होंने खुद कहा कि पुलिस सर्च करने आई थी और पुलिस ने कहा कि थोड़ा सा स्टॉक ज्यादा है। यहां करीब पुलिस के 6 से 7 जवानों ने दबीश दी। हालांकि ये गोदाम एक शैक्षणिक संस्थान और छात्रावास के बेहद नजदीक संचालित पाए गए, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार स्थानीय क्षेत्र में पांच से अधिक पटाखा गोदाम संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा चेनपुरा में फोर्थ आरएसी के पास मैजिक फायर वर्क्स नाम से एक अवैध कारखाना और गोदाम भी मिला। वहीं जमवारामगढ़ थाना क्षेत्र में हीरावाला बस स्टैंड से करीब 300 मीटर पहले जयपुर मार्ग पर शराब के ठेके के पीछे दो अवैध गोदामों पर कार्रवाई की गई। बता दें कि ये आवासीय क्षेत्र में गोदाम संचालित किए जा रहे थे। प्रारंभिक जांच में पुलिस गोदाम मालिकों की पहचान करने में जुटी है। हीरावाला से रूपवास लिंक रोड पर मुख्य सड़क से करीब 200 मीटर अंदर आवासीय इलाके में दो अन्य पटाखा गोदाम पकड़े गए। इसके अलावा हीरावाला से जमवारामगढ़ जाने वाले मार्ग पर भी दो गोदामों का पता चला, जहां सीएसटी टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई की। पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के निर्देशन में एसीपी आमेर और जयसिंहपुरा खोर थाना पुलिस की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और गोदाम संचालकों से पूछताछ जारी है। हालांकि, इन अवैध गोदामों और फैक्ट्रियों के लंबे समय से संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीट सिस्टम होने के बावजूद कई स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक बारूद और पटाखे मिले, जबकि कई जगहों पर अवैध फैक्ट्रियां और गोदाम खुलेआम संचालित हो रहे थे। गौरतलब है कि खोनागोरियान पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड में आठ लोगों की मौत के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और गोदामों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर सर्वे और विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सीएसटी की कार्रवाई के बाद पूरे मामले की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग भी तेज हो गई है।
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