Sunday, August 2, 2026
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झालावाड़ की गागरोनी तोता साड़ी बनी पहचान: 50 महिलाओं के सपनों को मिली उड़ान, कलेक्टर ने की सराहना – jhalawar News




झालावाड़ जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को नई पहचान दिलाने वाली असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी का शनिवार को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने निरीक्षण किया। उन्होंने गागरोनी तोता साड़ी सहित विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए संस्था की सराहना की, जो करीब 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के साथ पारंपरिक कला के संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है। पारंपरिक उत्पादों का किया अवलोकन निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने गागरोनी तोता साड़ी, गागरोनी तोता बेडशीट, सिंगल व डबल खेस, बेडशीट और टॉवल सहित विभिन्न हथकरघा उत्पादों को देखा। उन्होंने बुनकरों और महिला कारीगरों से उत्पादन प्रक्रिया, डिजाइनों की विशेषताओं और उत्पादों के विपणन की जानकारी भी ली। 50 ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर जिला कलेक्टर ने कहा कि सोसाइटी जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को संरक्षित करने के साथ उसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था लगभग 50 ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है। इसे उन्होंने महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक पहल बताया। गागरोनी तोता साड़ी बनी जिले की पहचान कलेक्टर ने कहा कि सोसाइटी के उत्पादों में स्थानीय संस्कृति और गागरोन क्षेत्र की पारंपरिक कला की सुंदर झलक दिखाई देती है। विशेष रूप से गागरोनी तोता साड़ी झालावाड़ की विशिष्ट पहचान बन चुकी है, जिसे राज्य और जिला स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। रद्दी अखबार से तैयार हो रहे उपयोगी उत्पाद निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने महिलाओं द्वारा रद्दी अखबार से हैंडबैग, मोबाइल बैग और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने की पहल की भी सराहना की। उन्होंने इसे रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने वाला उत्कृष्ट नवाचार बताया। पुरस्कारों से बढ़ा हथकरघा कला का सम्मान जिला कलेक्टर ने बताया कि सोसाइटी के सदस्य सुजानमल को वर्ष 2025 में गागरोनी तोता साड़ी के लिए राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार में द्वितीय स्थान मिला था। वहीं इस साल गीता बाई को इसी उत्पाद के लिए प्रथम जिला स्तरीय बुनकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां झालावाड़ की पारंपरिक हथकरघा कला के बढ़ते सम्मान का प्रतीक हैं। विपणन और प्रशिक्षण को और मजबूत करने के निर्देश निरीक्षण के अंत में जिला कलेक्टर ने सोसाइटी के उत्पादों के विपणन, डिज़ाइन विकास और प्रशिक्षण गतिविधियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्था भविष्य में झालावाड़ की हथकरघा कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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