राफेल पहले से ही भारतीय वायुसेना की रीढ़ बन चुके हैं, लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनने वाले ये नए राफेल सिर्फ संख्या नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि देश की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी मजबूत करेंगे. यही वजह है कि इस खबर ने सोशल मीडिया से लेकर स्ट्रैटेजिक सर्कल तक हर जगह उत्साह और गर्व का माहौल बना दिया है.
राफेल का युद्ध में साबित दम
राफेल पहले ही ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में अपनी मारक क्षमता साबित कर चुके हैं. उस वक्त पाकिस्तानी और चीनी हथियार सिस्टम्स को पछाड़ते हुए राफेल ने भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाई थी. इसके एडवांस्ड SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम ने PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल जैसे खतरनाक हथियारों को भी बेअसर किया.
‘मेड इन इंडिया’ राफेल से बनेगी दुश्मनों की दहशत
फ्रांस भारत में M-88 इंजन का मेन्टेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर हैदराबाद में बनाने की तैयारी में है. इसके साथ ही टाटा समेत कई भारतीय एयरोस्पेस कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट की पार्टनर बनेंगी.
भविष्य का एयर पावर स्ट्रक्चर
IAF की भविष्य की फाइटर फ्लीट अब तीन स्तंभों पर खड़ी होगी-सुखोई-30MKI, राफेल और स्वदेशी तेजस. इसके साथ ही 2035 के बाद भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी शामिल करेगा.
राफेल का यह ‘मेक इन इंडिया’ सौदा सिर्फ एक डिफेंस डील नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी छलांग है. यह दुश्मनों के लिए ‘डर’ और भारतवासियों के लिए ‘गर्व’ का दूसरा नाम बनने जा रहा है.

