कोटा से रावतभाटा के बीच चलने वाली रोडवेज बसों की हालत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच बसों का बार-बार खराब होना, ब्रेक फेल होने जैसी शिकायतों ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना इस रूट पर सफर करने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और मजबूरी में जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्रियों के मुताबिक, कई बार बसें बीच रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। इस रूट पर कई जगह गहरी खाई भी है, ऐसे में ब्रेक काम नहीं करने जैसी स्थिति बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों ने बताया कि कई बार बसों के ब्रेक ने जवाब दे दिया, तो कभी इंजन बंद हो गया। इन हालातों में सफर करना किसी खतरे से कम नहीं है। स्थानीय निवासी बालकिशन गुलाटी ने आरोप लगाया कि कोटा डिपो की बसें “भगवान भरोसे” चल रही हैं। उनका कहना है कि बसों में न तो लाइट की सुविधा है और न ही तकनीकी स्थिति ठीक है। कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ड्राइवर शराब पीकर बस चलाते हैं, जिससे यात्रियों की जान और ज्यादा खतरे में पड़ जाती है। समस्या सिर्फ बसों की खराब स्थिति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण बन रही है। कंडक्टरों की कमी के चलते हफ्ते में 2 से 3 दिन बसों का संचालन ही नहीं हो पाता। पिछले तीन दिनों से सुबह चलने वाली बसें बंद रहीं, जिससे डेली अप डाउन करने वाले यात्रियों को घंटों तक बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि सुबह की बस कभी आती है तो कभी नहीं, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर सुबह अप डाउन करने वाले लोगों को और मरीजों, जरूरी काम से आने-जाने वालों पर पड़ रहा है। यात्रियों ने बताया कि बस सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी गाड़ियों और टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जिससे खर्च भी बढ़ता है और परेशानी भी। वहीं, जब इस मामले में रोडवेज अधिकारियों से बात की गई तो डिपो की ऑपरेशन मैनेजर श्वेता गुप्ता ने दावा किया कि कोटा से रावतभाटा के बीच रोज तीन बसें अप-डाउन कर रही हैं और सभी बसें फिट हैं। उन्होंने माना कि एक बस में तकनीकी खराबी आई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। रोडवेज प्रबंधक अजय मीणा ने बताया कि वर्तमान में 2012-13 मॉडल की करीब 14-15 बसें है जिनमें से कुछ बस इस रूट पर संचालित हो रही हैं। नई बसों को फिलहाल लंबी दूरी के रूट पर लगाया गया है, लेकिन अगले महीने तक 17 नई बसें आने की संभावना है, जिसके बाद इस रूट पर भी राहत मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी बसों का डिपो में नियमित चेकअप किया जाता है। स्टाफ की कमी को लेकर भी अधिकारियों ने माना कि कंडक्टरों की कमी के चलते संचालन प्रभावित हुआ है। फिलहाल कुछ निजी कर्मचारियों की मदद ली जा रही है और आश्वासन दिया गया है कि अब रोजाना बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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