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Bihar Most Delicious Fish: बिहार में मछली पालन तेजी से बढ़ रहा है. गंगा, तालाब और चौर क्षेत्र की मछलियों का स्वाद अलग होता है. मत्स्य पदाधिकारी के अनुसार, प्राकृतिक वातावरण और नेचुरल फीड मिलने के कारण चौर क्षेत्र की मछली सबसे अधिक स्वादिष्ट, मीठी और लाजवाब होती है.
Best Tasting Fish in Bihar: नॉनवेज प्रेमियों के बीच मछली का क्रेज हमेशा से रहा है. अलग-अलग प्रजाति की मछलियां और उन्हें बनाने का अनोखा अंदाज हर जगह के स्वाद को खास बना देता है. यही वजह है कि लोग मछली बड़े ही चाव से खाते हैं. ऐसे में आपको यह जानना बेहद जरूरी है कि बिहार में अब मछली पालन का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. एक समय था जब बिहार मछली के लिए पूरी तरह से पश्चिम बंगाल पर निर्भर था. वहां से बड़े पैमाने पर मछलियां यहां आती थीं. अब बंगाल से होने वाली सप्लाई में कमी आई है. क्योंकि बिहार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है. फिर भी कुछ मात्रा में बाहर से मछलियां अब भी आती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किस क्षेत्र की मछली खाने में सबसे अधिक स्वादिष्ट होती है? आइए आज इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
किस क्षेत्र की मछली का स्वाद है सबसे बेस्ट?
भोजन में अगर बेहतरीन स्वाद मिल जाए तो खाने का आनंद दोगुना हो जाता है. बिना सही स्वाद और तड़के के अच्छा से अच्छा खाना भी फीका लगता है. मछलियों के स्वाद और उनकी क्वालिटी को लेकर जब भागलपुर के मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया से बात की गई. तो उन्होंने बेहद दिलचस्प जानकारियां साझा कीं. उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से हमारे बिहार में तीन अलग-अलग जगहों पर मछलियां पाई या पालन की जाती हैं. इसमें सबसे पहले गंगा नदी की मछली, दूसरी सामान्य तालाबों में पाली जाने वाली मछली और तीसरी चौर या चानन क्षेत्र के जलस्रोतों की मछलियां होती हैं. मत्स्य पदाधिकारी के अनुसार इन तीनों जगहों की मछलियों का स्वाद एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है. वहीं पहले नम्बर पर बात करे तो रेहू, दूसरे नम्बर पर बात करें तो कतला, तीसरे नम्बर पर बात करें तो सीलन सबसे ज्यादा मछली प्रेमियों को भाता है.
जानिए क्यों चौर क्षेत्र की मछली है सबसे लाजवाब
मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया ने इसके पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि अक्सर जब आप बाजार से मछली घर लाते होंगे. इसमें से कुछ मछलियों से तीव्र गंध आती है. अमूमन ऐसी मछलियां गंगा नदी की होती हैं. क्योंकि नदी के बहाव में कई बार सड़ी-गली चीजें या अवशेष होते हैं. जिन्हें मछलियां खा लेती हैं. इस वजह से उनके मांस से गंध आने लगती है. वहीं दूसरी ओर सामान्य तालाबों में पाली जाने वाली मछलियों को एक सीमित दायरा और सीमित भोजन (आर्टिफिशियल फीड) ही मिल पाता है. इन सबसे अलग अगर चानन या चौर क्षेत्र की बात करें तो वहां की मिट्टी की बनावट और जलवायु बिल्कुल भिन्न होती है. चौर क्षेत्र के जलभराव वाले इलाकों में मछलियों को प्राकृतिक भोजन के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दाना भी मिल जाता है. इस प्राकृतिक वातावरण और नेचुरल फीड के कारण चौर क्षेत्र की मछली का स्वाद सबसे अनोखा, मीठा और लाजवाब होता है.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

