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IAS Manoj Agarwal: सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अग्रवाल 1990 बैच के IAS अफसर हैं, जिन्हें 2026 चुनावों के बाद रिटायर होना है.
- मनोज कुमार अग्रवाल 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं. वे फिलहाल बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हैं. लेकिन इससे पहले भी उनका कार्यकाल कई अहम विभागों में बीता है, जैसे फूड एंड सप्लाईज और फॉरेस्ट एंड डिजास्टर मैनेजमेंट.
- अग्रवाल का नाम पहली बार चर्चा में 2018 में तब आया जब उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए. यह कदम उस वक्त की सरकार को नागवार गुजरा और जल्द ही उन्हें उस विभाग से हटा दिया गया.
- बाद में, 2023 में उसी विभाग के तत्कालीन मंत्री ज्योतिप्रियो मलिक को CBI ने राशन घोटाले में गिरफ्तार किया. यानी, अग्रवाल का कदम बाद में सही साबित हुआ.
- 2009 में उन पर CBI ने अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्ज किया था, लेकिन 2015 में कोर्ट ने उन्हें इस केस से बरी कर दिया.
चुनाव आयोग ने खुद चुना, राज्य की पहली लिस्ट रिजेक्ट की
दिसंबर 2024 में पूर्व CEO अरीज अफताब के रिटायर होने के बाद यह पद खाली हुआ था. राज्य सरकार ने आयोग को तीन नामों की लिस्ट भेजी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने उसे रिजेक्ट कर दिया. फिर बंगाल सरकार को नई लिस्ट भेजनी पड़ी, जिसमें अग्रवाल, कृष्णा गुप्ता और बरुण कुमार रॉय के नाम शामिल थे.
आयोग ने अग्रवाल को चुना, क्योंकि वे जुलाई 2026 में रिटायर होंगे. यानी चुनावों के बाद. चुनाव आयोग चाहता था कि नया CEO चुनावों के बाद रिटायर हो, ताकि वह राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम कर सके.

