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True Story of Operation Sindoor: पहलगाम में आतंकी हमले के बाद 88 दिन चले ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया. चंद दिनों की इस लड़ाई में पाकिस्तान की हालत यह हो गई कि भारत के सामने रहम की भीख मांगने लगा. ऑपरेशन सिंदूर में जीत के दो टर्निंग प्वाइंट्स कौन से थे, उसका खुलासा चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने किया है.
True Story of Operation Sindoor: जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद शुरू हुए भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था. महज 88 घंटे के इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की हालत कुछ ऐसी हुई कि वह घुटनों पर आकर भारत से रहम की भीख मांगने लगा. ऑपरेशन सिंदूर में यह टर्निंग प्वाइंट कब और कैसे आया, इसकी पूरी कहानी खुद चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बयान की है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में दो ऐसे टर्निंग प्वाइंट थे, जिनकी वजह से पाकिस्तान घुटनों पर आने के लिए मजबूर हो गया.
उन्होंने बताया कि पहला टर्निंग प्वाइंट भारतीय वायुसेना की वह सर्जिकल स्ट्राइक थी, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था. टेरर टारगेट्स पर 22 मिनट की इस स्ट्राइक ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया था. 22 मिनट की इस स्ट्राइक के बाद न केवल पाकिस्तान का पॉलिकल स्टैबलिशमेंट, बल्कि पाकिस्तानी सेना अपने सोचने समझने की ताकत खो चुकी थी. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह क्या हो गया और इस परिस्थिति का सामना वह कैसे करें. नतीजा यह है कि जिसके हाथ में जो आया, उसने वह फेंकना शुरू कर दिया.
पाकिस्तानी मिस मैनेजमेंट का भारत ने दिया कैलिब्रेटेड रिस्पांस
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पाकिस्तान में हालात यहां तक बिगड़ गए कि कार्रवाई के नाम पर किस ने पत्थर, किसी ने ड्रोन और किसी ने मिसाइस फेकना शुरू कर दिया. उस तरफ, इस कदर अफरातफरी मची हुई थी कि किसी को समझ में नहीं आया कि क्या कार्रवाई हो रही है. पाकिस्तान की तरफ से जो यह मिस मैनेजमेंट हुआ उसका भारतीय सैन्य बलों ने कैलिब्रेटेड रिस्पांस दिया, ताकि युद्ध आगे न बढ़े. क्योंकि, हमारा मकसद कभी भी युद्ध नहीं था और हम अपना टारगेट एचीव कर चुके थे. पहलगाम के हमलावरों के ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जा चुका था.
सैटेलाइट से पाकिस्तानी सेना तक पहुंची पूरी जानकारी
दूसरे टर्निंग प्वाइंट का जिक्र करते हुए आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि शायद इस बात को खुलेतौर पर तो नहीं बताया जा सकता है, लेकिन 10 तारीख की सुबह तीनों सेनाओं को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए थे कि अगर ये लड़ाई आगे बढ़ती तो क्या करना है. पाकिस्तान का नाम लिए बगैर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह बात जिसको समझ में आना था, उसकी समझ में आ चुकी थी. पाकिस्तान के पास सेटेलाइट से एक पूरी खबर थी कि भारत का कौन सा शिप, कौन सा स्ट्राइक कोर या पिवोट कोर या कौन सा एयरक्रॉफ्ट कहां मूव कर रहा है.
रहम के लिए डीजीएमओ को करने लगे कॉल पर कॉल
उन्होंने बताया कि सारे डॉट्स को जोड़ने के बाद पाकिस्तान को अच्छी तरह से समझ में आ गया कि आगे क्या होने वाला है. लिहाजा उनको लगा कि अब यहीं पर लड़ाई को रोकना ठीक होगा और वही उनके लिए फायदेमंद होगा. इसके बाद, सुबह करीब 9:30 बजे के करीब पाकिस्तानी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) का कॉल हमारे डीजीएमओ के पास आना शुरू हो गए. ऑपरेशन सिंदूर के यही दो ऐसे टर्निंग प्वाइंट्स थे, जिसकी वजह से पाकिस्तान न केवल घुटनों पर आ गया, बल्कि भारतीय सेना से रहम की भीख मांगने के लिए मजबूर हो गया.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

