टिकट कटने का खतरा बढ़ा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक BJP अपने मौजूदा 258 विधायकों में से 100–120 का टिकट काट सकती है. 70–80 सीटों पर नए चेहरों की तैयारी है. साथ ही RLD और SBSP जैसे सहयोगियों के लिए भी कुछ सीटें छोड़ी जाएंगी. यानी 2027 चुनाव में कई सीटों पर बीजेपी का चेहरा पूरी तरह बदला हुआ होगा.
कई विधायकों पर आरोप है कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते. लोगों से मुलाकात कम करते हैं और व्यवहार में भी नरमी नहीं दिखाते. खनन और ठेकों में गड़बड़ी जैसे मामलों की शिकायतें लखनऊ से दिल्ली तक पहुंच रही हैं. झांसी में BJP विधायक के समर्थकों द्वारा ट्रेन यात्री की पिटाई की घटना तो सीधे RSS के वरिष्ठ नेता की मौजूदगी में हुई, जिससे मामला और गंभीर बन गया.
सर्वे का फॉर्मूला
A कैटेगरी: लोकप्रिय नेता, जिनकी छवि और पकड़ मजबूत है.
C कैटेगरी: कमजोर नेता, जिनकी छवि खराब है और जनता से जुड़ाव कम है.
BJP का फॉर्मूला नया नहीं
2017 और 2022 चुनाव में भी पार्टी ने कई विधायकों के टिकट काटे थे. उस समय तीन दर्जन से ज्यादा नेताओं को बाहर कर नए चेहरे उतारे गए. इससे बीजेपी को एंटी-इनकम्बेंसी से राहत मिली. यही वजह है कि पार्टी अब और बड़े पैमाने पर यह प्रयोग दोहराने जा रही है.
पार्टी के विधायकों में बेचैनी साफ दिख रही है. एक वरिष्ठ विधायक ने माना कि BJP में टिकट कभी पक्का नहीं होता. मेहनत करने के बावजूद सर्वे की रिपोर्ट खराब आई तो टिकट कट सकता है. हालांकि, पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि 2027 में जीत ही सबकुछ है. नए चेहरे उतारने से भी अगर जीत पक्की होती है, तो पुराने को हटाने में झिझक नहीं होगी.
जातीय समीकरण और विपक्षी चुनौती
2027 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच INDIA गठबंधन मजबूत हो सकता है. ऐसे में जातीय समीकरण निर्णायक रहेंगे. बीजेपी जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर टिकट बांटेगी. यही वजह है कि हर सीट पर तीन नामों का पैनल बन रहा है और अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा.
योगी के लिए मैसेज?
यह सर्वे योगी आदित्यनाथ के लिए अनुशासन और परफॉर्मेंस दोनों का मैसेज है. वहीं, दिल्ली के लिए यह दिखाने का मौका है कि BJP व्यक्तियों से बड़ी है. अगर 100 से ज्यादा टिकट कटते हैं तो यह संदेश साफ होगा कि पार्टी में सिर्फ जीतने वाला और जनता से जुड़ा चेहरा ही आगे बढ़ेगा.

