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गर्मी का मौसम शुरू होते ही गोरखपुर में पारंपरिक मुरब्बों, अचार और खुमचा की मांग बढ़ जाती है. बेल, आंवला, आम और करौंदे से तैयार ये देसी व्यंजन स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं और आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.
गोरखपुर. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में कुछ ऐसे पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ जाती है, जो न केवल स्वाद में खास होते हैं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. कच्चे और पके फलों से तैयार होने वाले मुरब्बे, अचार और खुमचा इन्हीं में शामिल हैं. गोरखपुर में पिछले कई दशक से इस कारोबार से जुड़े प्राणनाथ बताते हैं कि गर्मी के दिनों में लोग खास तौर पर ऐसे उत्पादों की तलाश करते हैं, जो शरीर को ठंडक देने के साथ ऊर्जा भी प्रदान करें.

प्राणनाथ के अनुसार, गर्मियों में सबसे ज्यादा मांग बेल, आंवला, आम और करौंदे से तैयार मुरब्बों की रहती है. बेल का मुरब्बा पाचन के लिए लाभकारी माना जाता है, जबकि आंवले का मुरब्बा विटामिन-सी का अच्छा स्रोत होता है. कच्चे आम से तैयार मीठा और मसालेदार मुरब्बा भी लोगों को खूब पसंद आता है. इन मुरब्बों को पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है, जिससे उनका स्वाद लंबे समय तक बरकरार रहता है.

गर्मियों के मौसम में कच्चे आम का अचार सबसे अधिक बिकने वाले उत्पादों में शामिल है. नींबू, मिर्च, करौंदा और मिश्रित फलों के अचार की भी अच्छी मांग रहती है. कई परिवार पूरे साल के लिए इसी मौसम में अचार तैयार कराते हैं.
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प्राणनाथ बताते हैं कि कुछ ग्राहक अपनी पसंद के मसालों के साथ विशेष ऑर्डर भी देते हैं. गोरखपुर और पूर्वांचल के कई इलाकों में खुमचा गर्मियों का एक लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन माना जाता है. इसे मुख्य रूप से कच्चे आम के साथ कुछ अन्य मौसमी फलों और मसालों को मिलाकर तैयार किया जाता है.

इसका खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है. माना जाता है कि यह शरीर को ताजगी देने के साथ धूप और गर्मी के असर को कम करने में भी मदद करता है.

प्राणनाथ बताते हैं कि बदलते समय के बावजूद पारंपरिक मुरब्बों, अचारों और खुमचा का आकर्षण कम नहीं हुआ है. आज भी गर्मियों में इनकी मांग इतनी अधिक रहती है कि कई ग्राहक पहले से ऑर्डर बुक करा देते हैं. यही वजह है कि दशकों पुरानी यह परंपरा आज भी लोगों की थाली और स्वाद दोनों में अपनी खास जगह बनाए हुए है.

