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गाजियाबाद की तंग गलियों में स्थित लल्लूमन हलवाई की छोटी सी दुकान पिछले 70 सालों से लोगों के दिलों और ज़ुबान पर राज कर रही है. समोसे, जलेबी और इमरती का ऐसा अनोखा स्वाद यहां मिलता है कि गाजियाबाद ही नहीं बल्कि दि…और पढ़ें
यहां मिलने वाले गर्मागर्म समोसे के साथ हरी और लाल चटनी स्वाद को दोगुना कर देती है. वहीं कुरकुरी जलेबी और रस से भरी इमरती यहां आने वालों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं. यही वजह है कि गाजियाबाद ही नहीं बल्कि दिल्ली, मेरठ और आसपास के जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं.
दुकान के संचालक राहुल गर्ग बताते हैं कि इस दुकान की नींव उनके परदादा ने रखी थी. उसके बाद दादाजी, पिताजी और अब वे खुद इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. राहुल कहते हैं, ‘हमारा मकसद सिर्फ दुकान चलाना नहीं, बल्कि लोगों को वही पुराना स्वाद देना है जो हमारे बुजुर्गों ने शुरू किया था’.
किफायती दाम और लोकप्रियता
यहां की खासियत यह है कि स्वादिष्ट व्यंजन आज भी बहुत किफायती दाम पर मिलते हैं. एक समोसा सिर्फ ₹12 का मिलता है, वहीं जलेबी ₹200 किलो और इमरती ₹280 किलो में उपलब्ध है. स्वाद और गुणवत्ता से कोई समझौता न होने की वजह से यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है. यहां स्वादिष्ट व्यंजन आज भी बेहद किफायती दामों पर मिलते हैं.
ग्राहकों की पहली पसंद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां का समोसा खाने के बाद बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स का स्वाद फीका लगता है. वहीं जलेबी और इमरती का रस और कुरकुरापन उन्हें बार-बार खींच लाता है. छुट्टियों और त्योहारों पर तो दुकान के बाहर लंबी कतार लगना आम बात है.

