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Contaminated Water In India: इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद लोग पलायन कर रहे हैं. भारत के कई शहरों में जहरीला पानी एक गंभीर संकट बन चुका है. गुरुग्राम के बंधवाड़ी में कूड़े के पहाड़ से निकला लीचेट कैंसर फैला रहा है. नोएडा और गाजियाबाद में TDS और सीवेज मिक्सिंग की समस्या गंभीर है. गांधीनगर में टाइफॉयड के 133 मामले सामने आए हैं. प्रशासन की लापरवाही आम आदमी की जान पर भारी पड़ रही है.
इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी ने ली जान, क्यों लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं?

भागीरथपुरा में कथित तौर पर दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद एक नगर निगम कर्मचारी इलाके को सैनिटाइज करता दिखा. (PTI फोटो)
शुभम की 75 साल की मां प्रेम रानी न्यूज़ 18 के कैमरे पर फूट-फूटकर रोने लगीं. उन्होंने कहा कि पोते की ऐसी हालत देखकर वह बहुत डर गई हैं. अब वे लोग इंदौर में एक पल भी रुकना नहीं चाहते हैं. उनका कहना है कि जान बची तो दोबारा काम ढूंढ लेंगे. यह परिवार अब वापस सागर लौट रहा है क्योंकि यहां पानी मौत बांट रहा है. इंदौर की इस घटना ने पूरे प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है. लोग अब नगर निगम और जल विभाग पर भरोसा खो चुके हैं. दूषित पानी की वजह से लोग अब अपने ही शहर में रिफ्यूजी बन गए हैं. यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं बल्कि पूरे इलाके का दर्द है.
क्या गुरुग्राम के बंधवाड़ी का कूड़े का पहाड़ गांव वालों के लिए मौत का फरमान बन चुका है?
दिल्ली से सटे गुरुग्राम के बंधवाड़ी गांव में इन दिनों दहशत का माहौल है. यहां बना कूड़े का विशाल पहाड़ अब गांव वालों के लिए काल बन गया है. इस पहाड़ से एक काला और बेहद ज़हरीला पानी रिसता रहता है. इस जहरीले तरल को लीचेट कहा जाता है जो ज़मीन के अंदर जा रहा है. यह काला ज़हरीला पानी गांव के ग्राउंडवाटर में पूरी तरह मिक्स हो चुका है. इसकी वजह से गांव के लोग सालों से ज़हरीला पानी पीने को मजबूर हैं. यहां के पानी का रंग और गंध दोनों ही डराने वाले हैं. गांव के लोगों का कहना है कि जब से यह खत्ता बना है तब से बीमारियां बढ़ी हैं. जहरीले पानी की वजह से लोग कैंसर और हार्ट जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. गांव में कैंसर के करीब 50 मरीज आज भी अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं.
बंधवाड़ी के रहने वाले तेजराम की कहानी सुनकर रूह कांप जाती है. कुछ साल पहले उनकी पत्नी की मौत कैंसर की वजह से हो गई थी. अब तेजराम खुद भी दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. उन्होंने बताया कि गांव में कैंसर से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. लेकिन सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि लोग इस पर बात नहीं करना चाहते. गांव में बीमारी की बात फैलने से युवाओं के रिश्ते होने में दिक्कत आती है. लोग अपनी पहचान और बीमारी को छिपाने पर मजबूर हो गए हैं. घरों में बर्तन धोने से लेकर कपड़े धोने तक में इसी पानी का उपयोग होता है. कुछ गरीब परिवार तो मजबूरी में इसे पी भी रहे हैं. कूड़े के पहाड़ से उठने वाली बदबू ने सांस लेना भी दूभर कर दिया है.

