Last Updated:
Wire Price Hike : फिनोलेक्स और पॉलीकैब इंडिया ने वायर और केबल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. दोनों ही कंपनियों का कहना है कि तांबे का रेट बढ़ने की वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है. देश की एक और प्रमुख तार निर्माता कंपनी आरआर केबल भी रेट बढ़ाने की तैयारी में है.
मार्जिन बचाने के लिए कंपनियों ने तारों के रेट बढा दिए हैं. (Photo : Canva)
नई दिल्ली. आम आदमी महंगी चीनी की मार से पहले ही तंग था. अब घर में बिजली की फिटिंग और वायरिंग कराना भी महंगा हो गया है. देश की दिग्गज वायर और केबल निर्माता कंपनियों, पॉलीकैब इंडिया और फिनोलेक्स केबल्स ने तारों के रेट बढ़ा दिए हैं. बिजली के तारों में महंगाई का करंट ग्लोबल मार्केट में तांबे (Copper) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से दौड़ा है. केबल और वायर उद्योग में कुल कच्चे माल की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा तांबे का होता है. पिछले कुछ समय से तांबे की कीमतों और इनपुट कॉस्ट में आई भारी तेजी ने कंपनियों को अब तार और केबल्स का रेट बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है.
मार्केट की दिग्गज कंपनियों ने ग्राहकों की जेब पर अलग-अलग तारीखों से नया बोझ डाला है. फिनोलेक्स केबल्स ने 4 सितंबर से अपने लाइट ड्यूटी केबल्स और कम्युनिकेशन केबल्स की कीमतों में 3 फीसददी की बढ़ोतरी लागू कर दी है. इससे अब घर की इंटरनल वायरिंग और इंटरनेट/कम्युनिकेशन लाइन बिछाने का खर्च बढ़ जाएगा. पॉलीकैब इंडिया ने 2 सितंबर से अपने कई प्रोडक्ट के दाम बढ़ा दिए है. कंपनी ने घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 90 मीटर और 180 मीटर वाले वायर बंडलों की लिस्टिंग कीमत में 3 फीसदी का इजाफा किया है.
आरआर केबल और केईआई इंडस्ट्रीज भी बढ़ा सकती हैं रेट
एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में मची इस उठापटक के बीच अन्य बड़ी कंपनियों की रणनीति देखने लायक है. आरआर केबल (RR Kabel) ने अपने चुनिंदा प्रोडक्ट के दाम में 2 से 3.5 फीसदी बढ़ोतरी करने का ऐलान तो किया था, लेकिन बाजार में कंपीटिशन को देखते हुए फिलहाल नए रेट लागू नहीं किए हैं. ईआई इंडस्ट्रीज (KEI Industries) ने अभी तक अपने रेट नहीं बढ़ाए हैं.
केबल और वायर सेक्टर में इस समय जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने है.
एक तरफ कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनियों का मुनाफा घट रहा है, वहीं दूसरी तरफ दाम बढ़ाते ही मार्केट शेयर खोने का डर भी बना रहता है. यही वजह रही कि कंपनियों ने डीलरों को अगस्त में ही अलर्ट करने के बावजूद कीमतों को तुरंत लागू करने में वक्त लिया. हालांकि, अंततः मार्जिन बचाने के लिए कमोडिटी की इस तेजी का सीधा बोझ आम ग्राहकों की जेब पर ही ट्रांसफर कर दिया गया है.
About the Author

रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
और पढ़ें

