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राष्ट्रपति भवन के शाही भोज ने मोदी-पुतिन मुलाकात को खास रंग दिया. पुतिन ने सबका साथ, सबका विकास का ज़िक्र कर रिश्तों की गर्माहट बढ़ाई, जबकि भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों, शास्त्रीय संगीत और बॉलीवुड धुनों ने मेहमाननवाजी को अनोखा सांस्कृतिक स्पर्श दिया. ऊर्जा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और शांति संवाद पर बनी तालमेल के बीच यह डिनर दोनों देशों की दोस्ती का गर्मजोशी भरा प्रतीक बना.
राष्ट्रपति भवन के शाही भोज में पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” का जिक्र कर रिश्तों की गरमी बढ़ा दी. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यह नारा भारत-रूस साझेदारी की असली पहचान है. उनकी यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच विश्वास, सम्मान और साझा प्रगति के संदेश को और मजबूत करती दिखी.

पुतिन ने भोज के दौरान 15 साल पहले हुई “विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” की घोषणा को याद किया. उनका कहना था कि यह संबंध समानता और सम्मान पर बने हैं, और अब पहले से अधिक मजबूत हो चुके हैं. इस याद ने संकेत दिया कि भारत-रूस रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि लंबे भरोसे पर टिके हैं.

शाही डिनर से पहले मोदी और पुतिन की मुलाकातें काफी खुली और निजी माहौल वाली रहीं. राष्ट्रपति भवन में भी यह दोस्ताना टोन साफ दिखा. पुतिन ने कहा कि बातचीत रचनात्मक रही और कई क्षेत्रों में नए अवसर उभरकर आए हैं. इस सहजता ने दोनों देशों की गर्मजोशी को और उजागर किया.
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा तैयार शाकाहारी राज्य भोज में भारत की विविधता पूरी तरह चमक उठी. कश्मीर की गुच्छी दून चेतिन से लेकर पूर्वी हिमालय के झोल मोमो और दक्षिण भारत के मुरुक्कू तक, मेन्यू एक मिनी-इंडिया था. भोजन के माध्यम से कूटनीतिक सम्मान का शानदार प्रदर्शन किया गया.

मुख्य कोर्स में जाफरानी पनीर रोल, पालक-मटर साग, अचारी बैंगन और पीली दाल तड़का परोसे गए, जिन्हें केसर-पुलाव और विभिन्न भारतीय रोटियों के साथ पेश किया गया. मिठाई में बादाम हलवा और केसर-पिस्ता कुल्फी ने मेन्यू को संपूर्ण बनाया. यह भोजन भारतीय आतिथ्य का गर्मजोशी भरा स्वागत संदेश था.

नौसेना बैंड और शास्त्रीय कलाकारों ने एक साथ भारतीय और रूसी रचनाएं बजाकर दोस्ती की खास धुन रची. शाहरुख खान की फिल्म का गाना और रूसी लोक धुन ‘कलिंका’ एक ही मंच पर गूंजीं. सरोद, सारंगी, तबला और चायकोवस्की की धुनों ने कूटनीति को सांस्कृतिक रंग दे दिया.

डिनर से कुछ घंटे पहले ही दोनों नेताओं ने ऊर्जा सहयोग पर विस्तृत चर्चा की थी. पुतिन ने भारत को लगातार ईंधन सप्लाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई. शाही भोज ने इन चर्चाओं को सौहार्द का नया आयाम दिया, जहां रिश्तों की गंभीरता भोजन और बातचीत के बीच सहजता से झलकी.

दो दिवसीय भारत यात्रा के अंतिम औपचारिक कार्यक्रम के रूप में यह भोज बेहद प्रतीकात्मक रहा. स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों, संगीत और गर्मजोशी ने पुतिन की विदाई को खास बनाया. यह डिनर इस बात का संकेत भी था कि भारत-रूस संबंध सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि दिलों और परंपराओं के जुड़ाव पर चलते हैं.

