जयनारायण व्यास टाउन हॉल (फाइल फोटो)
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ ने जोधपुर के जयनारायण व्यास टाउन हॉल के प्रबंधन और सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से पांच प्रमुख मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो संबंधित अफसरों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
यह मामला वर्ष 2018 से चल रहा है, जिसमें कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जयनारायण व्यास टाउन हॉल की स्थिति पर सुनवाई की है। एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट के समक्ष पांच गंभीर मुद्दे उठाए हैं। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कम एडिशनल एडवोकेट जनरल राजेश पंवार और असिस्टेंट एडिशनल एडवोकेट जनरल आयुष गहलोत ने प्रतिनिधित्व किया।
पांच प्रमुख मुद्दे जो उठाए गए
एमिकस क्यूरी डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट के समक्ष निम्नलिखित पांच मुद्दे उठाए।
- पहला मुद्दा: यह है कि राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के सचिव संस्थाओं को सांस्कृतिक और अन्य गतिविधियों के लिए परिसर की बुकिंग की अनुमति नहीं दे रहे हैं। यह टाउन हॉल के मूल उद्देश्य के विपरीत है और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
- दूसरा मुद्दा: जयनारायण व्यास टाउन हॉल में उचित जनशक्ति की कमी से संबंधित है। पर्याप्त कर्मचारियों की अनुपस्थिति में टाउन हॉल का सुचारू संचालन मुश्किल हो रहा है।
- तीसरा मुद्दा: यह है कि परिसर का अजनबियों और अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। यह सुरक्षा और प्रबंधन की गंभीर कमी को दर्शाता है।
- चौथा मुद्दा : टाउन हॉल में अपर्याप्त बिजली आपूर्ति से संबंधित है। बिजली की कमी के कारण कार्यक्रमों के आयोजन में दिक्कतें आ रही हैं।
- पांचवां और सबसे गंभीर मुद्दा: यह है कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्माण के संबंध में कोई सुरक्षा ऑडिट नहीं किया गया है। यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
- जोधपुर के रंगकर्मियों में भी टाउन हॉल नहीं खोले जाने को लेकर आक्रोश है, लेकिन जिम्मेदार उनकी परवाह करते नजर नहीं आ रहे हैं। इमेज सोर्स – एआई
सरकार ने मांगा समय, कोर्ट ने दी चेतावनी
एडिशनल एडवोकेट जनरल ने एमिकस क्यूरी द्वारा उठाए गए पांच मुद्दों का जवाब देने के लिए कुछ समय मांगा। कोर्ट ने मांगे गए समय को स्वीकार कर लिया। हालांकि, कोर्ट ने AAG को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक संबंधित प्राधिकारी का हलफनामा कोर्ट के समक्ष उठाए गए सभी पांच मुद्दों के संबंध में दाखिल किया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो संबंधित प्राधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह बाद की तारीख पर सूचीबद्ध किया है। इस दौरान सरकार को सभी पांच मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा तैयार करना होगा। हलफनामे में यह बताना होगा कि बुकिंग में क्या रुकावटें आ रही हैं, जनशक्ति की स्थिति क्या है, अनधिकृत व्यक्तियों के दुरुपयोग को कैसे रोका जाएगा, बिजली आपूर्ति कैसे सुधारी जाएगी और सुरक्षा ऑडिट कब किया जाएगा।

टाउन हॉल के मुद्दे को लेकर गत दिनों जोधपुर के रंगकर्मियों ने भी कैंडल मार्च निकालकर सांकेतिक धरना भी दिया था। इसके दो महीने बाद भी स्थितियां यथावत बनी हुई है।

