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Karvy Scam : ब्रोकिंग कंपनी कार्वी के निवेशकों को अपने पैसे वापस लेने के लिए अब ज्यादा समय मिलेंगे. बाजार नियामक सेबी ने कहा है कि निवेशक 31 मार्च तक अपना क्लेम कर सकते हैं.
नई दिल्ली. बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दिवालिया घोषित कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल) के निवेशकों के लिए दावे दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर मार्च 2026 कर दी है. पहले यह समयसीमा 31 दिसंबर थी. केएसबीएल को 23 नवंबर, 2020 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ओर से दिवालिया घोषित कर दिया गया था. इसके बाद निवेशकों को केएसबीएल के खिलाफ दावे प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था, दावे जमा करने की अंतिम तिथि दो जून, 2025 निर्धारित की गई थी.
ब्रोकिंग कंपनी को दिवालिया घोषित करने के बाद क्लेम करने की तिथि कर्ठ बार बढ़ाई जा चुकी है. मई 2025 में सेबी की घोषणा की प्रतिक्रिया के बाद एनएसई के साथ दावा दायर करने की समय सीमा 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दी गई थी. सेबी ने कहा कि जागरूकता और समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद बड़ी संख्या में निवेशकों द्वारा अपने दावे दाखिल किए गए हैं. इसे देखते हुए, दावे दाखिल करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 करने का निर्णय लिया गया है.
क्या था कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग घोटाला
कार्वी समूह की यह स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी देश की एक प्रमुख स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी में शुमार थी. साल 2019 में खुलासा हुआ कि कंपनी ने ग्राहकों के शेयरों का दुरुपयोग करके हजारों करोड़ रुपये का लोन ले दिया है. कंपनी का यह कदम सेबी के नियमों के विपरीत था और इस कदम से करीब 95 हजार निवेशक प्रभावित हुए और कुल करीब 2,873 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई थी.
कैसे दिया घोटाले को अंजाम
कार्वी ने ग्राहकों से लिए गए पॉवर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया. पॉवर ऑफ अटॉर्नी एक कानूनी अनुमति है, जो ब्रोकर को ग्राहकों के डीमैट अकाउंट में ट्रांजेक्शन करने की अनुमति देता है. हालांकि, सेबी के नियमों के तहत कंपनी इसका इस्तेमाल खुद के फायदे के लिए नहीं कर सकती है. कंपनी ने इस नियम को दरकिनार करके निष्क्रिय ग्राहक के डीमैट अकाउंट से चुपचाप शेयर निकाल लिए. इन शेयरों को कंपनी के डीमैट अंकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया. इसके बाद इन शेयरों को ICICI, HDFC, IndusInd, Bajaj Finance जैसे बैंकों के पास गिरवी रखकर लोन ले लिया. इस कड़ी में कंपनी ने Bajaj Finance से ही करीब 300 करोड़ का लोन लिया है.
कंपनी ने किया पैसों का दुरुपयोग
कंपनी ने बैंकों से जुटाई लोन की रकम को ग्राहकों के बजाय अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया. इतना ही नहीं, इस फंड में से 1,096 करोड़ रुपये तो समूह की रियल एस्टेट कंपनी Karvy Realty को ट्रांसफर कर दिए गए थे. इसके अलावा कार्वी ने 9 शेल कंपनियां बनाई और इंश्योरेंस बिजनेस के बहाने बड़ी ट्रेडिंग की. इतना ही नहीं फंड को एनबीएफसी के जरिये घुमाया और जमकर संपत्तियां खरीदी. मामले का खुलासा होने पर सेबी ने 20 जून, 2019 को सर्कुलर जारी कर ब्रोकर पर ग्राहकों के शेयरों को गिरवी रखने से रोक लगा दी थी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

