वॉशिंगटन डीसी2 घंटे पहले
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अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा वीजा मिले हैं।
सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद पहली बार वहां अप्रवासियों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फरवरी में स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन 2026 के दौरान कहा था कि अमेरिकी सरकार का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है, न कि अवैध प्रवासियों की।
भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका पहुंचना मुश्किल हुआ
सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच एडमिशन का पीक सीजन होता है। इसी दौरान 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा पिछले साल के मुकाबले 62% घट गए। चीनी छात्रों पर भी असर पड़ा और उन्हें 34% कम वीजा मिले।
हालांकि, तस्वीर सभी देशों के लिए एक जैसी नहीं रही। 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल के मुकाबले 19.6% ज्यादा हैं। बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल की तुलना में 44.3% अधिक हैं।

4 फैसलों से अमेरिका जाने में गिरावट आई
1. सोशल मीडिया की जांच जरूरी: स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू दोबारा शुरू होने के बाद आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक करने पड़े। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की।
2. वीजा जांच पहले से ज्यादा सख्त: वीजा आवेदकों के दस्तावेज, यात्रा इतिहास और दूसरी जानकारियों की पहले के मुकाबले ज्यादा गहराई से जांच की जाने लगी। इससे वीजा प्रक्रिया लंबी हुई और कई मामलों में मंजूरी मिलने में देरी हुई।
3. शरण के नियम कड़े: अमेरिका में शरण मांगने वालों के लिए भी नियम सख्त किए गए। अब पहले के मुकाबले शरण मिलना आसान नहीं है।
4. अवैध अप्रवासियों पर सख्ती: अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ICE जैसी एजेंसी को ज्यादा अधिकार मिले। इसके बाद कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई बढी।

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में ICE के एक एजेंट ने कार सवार महिला को गोली मार दी थी। इसके खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ICE के खिलाफ नारेबाजी की।
अमेरिका की जगह यूरोप को चुन रहे हैं भारतीय छात्र
अमेरिका में सख्त होती इमिग्रेशन नीतियों के बीच कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश उनकी नई पसंद बनकर उभरे हैं। इसकी बड़ी वजह कम फीस, अपेक्षाकृत आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के बेहतर अवसर हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज के मुकाबले 50% से 80% तक कम है। यही वजह है कि 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी। वहीं जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों के दाखिले में 68% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सिर्फ छात्र ही नहीं, अमेरिका में काम कर रहे कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी सख्त वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं।
H-1B वर्क वीजा में भारतीय अब भी आगे
पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या घट रही है, लेकिन अमेरिकी कंपनियों में भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा बनी हुई है।
2024 में जारी सभी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही।

अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश
सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं।
2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है।
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है।

अमेरिका में अप्रवासियों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान ‘अप्रवासी अमेरिका को महान बनाते हैं’ लिखा पोस्टर लिए प्रदर्शनकारी।
अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी
ट्रम्प सरकार की सख्त नीतियों का असर अमेरिकी पर्यटन पर भी पड़ा है। 2025 में अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या घटकर करीब 6.83 करोड़ रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। इसके चलते विदेशी पर्यटकों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।
सबसे बड़ी गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों की संख्या में रही। इसके अलावा भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी घटी। हालांकि, इस दौरान मेक्सिको से अमेरिका आने वाले टूरिस्टों की संख्या बढ़ी।
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