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तिल-गुड़ के लड्डू: आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा ने बताया कि तिल के लड्डुओं में किसी भी प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता. शुद्ध गुड़, तिल और देसी घी से बने ये लड्डू स्वास्थ्यवर्धक और भरोसेमंद होते हैं. इसी कारण गांवों में आज भी लोग मकर संक्रांति पर पारंपरिक तरीके से तिल के लड्डू बनाना पसंद करते हैं.
Til Gud Ke Laddu Recipe: सर्दी का मौसम शुरू होते ही विंध्य क्षेत्र के घरों में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैलने लगती है. ठंड से बचाव और शरीर को ऊर्जा देने के लिए लोग देसी और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करते हैं. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में तिल और गुड़ के लड्डू का खास स्थान है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. सर्दियों में हर उम्र के लोगों द्वारा पसंद किए जाने वाले ये लड्डू विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी हैं.
सीधी जिले की रसोइया प्रियंका सिंह बताती हैं कि तिल और गुड़ के लड्डू बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती. इसमें सफेद या काले तिल, गुड़ और थोड़ा सा देसी घी इस्तेमाल किया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए कुछ लोग इलायची पाउडर भी मिलाते हैं, हालांकि पारंपरिक स्वाद के लिए तिल और गुड़ ही पर्याप्त होते हैं. लड्डू बनाने की शुरुआत तिल को धीमी आंच पर भूनने से होती है, जिससे उसकी खुशबू और स्वाद निखरकर सामने आता है.
तिल गुड़ के लड्डू बनाने की विधि
इसके बाद गुड़ को छोटे टुकड़ों में काटकर कढ़ाही में धीमी आंच पर पिघलाया जाता है. जब गुड़ पूरी तरह पिघल जाए, तो उसमें भुने हुए तिल मिलाकर अच्छी तरह चलाया जाता है. मिश्रण को हल्का ठंडा होने पर हाथों में घी लगाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लिए जाते हैं. ये लड्डू एयरटाइट डिब्बे में कई दिनों तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं.
स्वाद ही नहीं सेहत में भी हैं लाजवाब
ग्रामीण इलाकों में तिल के लड्डू को ताकत देने वाला भोजन माना जाता है. खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सर्दियों में इन्हें खास तौर पर खाते हैं. आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर आरपी परौहा ने बताया कि तिल में हेल्दी फैट्स, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. वहीं गुड़ शरीर को ऊर्जा देने के साथ ठंड से बचाव में भी सहायक है. ऐसे में सर्दियों में तिल और गुड़ के लड्डू सेहत और स्वाद, दोनों का बेहतरीन मेल साबित होते हैं.
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विभांशु द्विवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. पॉलिटिक…और पढ़ें

