मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि बड़वानी निवासी नीलेश (परिवर्तित नाम) अपनी मंगेतर अनीता (बदला हुआ नाम) के साथ नई जिंदगी के सपने देख रहा था। तभी एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया।
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कॉल करने वाले ने खुद को बड़ा अधिकारी बताते हुए चेतावनी दी कि वह अनीता से दूर हो जाए, वरना उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी जाएगी। कुछ ही देर बाद नीलेश के मोबाइल पर अनीता की मांग भरी तस्वीरें और धमकी भरे संदेश आने लगे।
अब सवाल यह था कि एक डिप्टी कलेक्टर और महिला पटवारी के बीच ऐसा क्या रिश्ता था, जो अदालत तक पहुंच गया? आगे पढ़िए…
अनीता ने नीलेश को बताया कि वह 2015 से अभय सिंह को जानती थी। उस समय अभय सेंधवा में एसडीएम था और 13 मार्च 2015 को उसने उसके अधीन पटवारी पद पर जॉइन किया था। एक परीक्षा का एडमिट कार्ड अभय के पास होने के कारण दोनों की मुलाकात हुई।
कुछ ही दिनों बाद अनीता एमपीपीएससी की तैयारी के लिए इंदौर चली गई। इसी दौरान उसके परिवार पर मुसीबतों का दौर शुरू हुआ। 24 मार्च 2015 को अभय की पत्नी उसके घर पहुंची और विवाद खड़ा कर दिया।
बाद में अभय की पत्नी की शिकायत पर अनीता के माता-पिता, भाई और भाभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई।

सरकारी बंगले पर बुलाकर रेप किया
अनीता के मुताबिक 2016 में उसने परिवार के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म कराने के लिए अभय से मदद मांगी। अभय ने उसे बड़वानी स्थित अपने सरकारी बंगले पर बुलाया।
अनीता का आरोप था कि 20 अप्रैल 2016 की शाम अभ्यसिंह ने उसके साथ वहां रेप किया। विरोध करने पर उसे नौकरी से निकलवाने और परिवार को फंसा देने की धमकी दी गई। साथ ही कहा कि यदि वह चुप रही तो परिवार के खिलाफ दर्ज मामले खत्म करवा दिए जाएंगे।
केसों का दबाव बनाकर उठाया फायदा
2017 में अभय की पत्नी ने एक और मामला दर्ज कराया, जिसमें अनीता, उसके भाइयों और अन्य लोगों के नाम शामिल थे। अनीता का आरोप था कि इसी दबाव का फायदा उठाकर अभय सिंह ने उस पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।

तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करता था
अनीता ने आरोप लगाया कि 22 दिसंबर 2023 की रात अभय सिंह उसके जुलवानिया स्थित किराए के मकान पर पहुंचा। वहां उसके साथ मारपीट की गई और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। इसी दौरान उसकी मांग में सिंदूर भरकर तस्वीरें खींची गईं।
महिला का आरोप था कि बाद में इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया गया। जहां भी उसकी शादी की बात चलती, वहां फोन कर कहा जाता कि वह पहले से अभय सिंह की पत्नी है। नौकरी से निकलवाने, एसिड अटैक कराने और जान से मरवाने तक की धमकियां देता था।
अनीता ने यह भी बताया कि इलाज के दौरान इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल की पर्ची में उसका नाम ‘वाइफ ऑफ अभय सिंह’ दर्ज कराया गया था। यह भी दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा था।
बचाव पक्ष की कहानी- सहमति से थे संबंध
दूसरी तरफ डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह ने अदालत में पूरी तरह अलग तस्वीर पेश की। उसका दावा था कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह सहमति से थे। वह अनीता को पत्नी की तरह रखता था, दोनों कई वर्षों तक साथ रहे, घूमे-फिरे और एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा रहे।
अभय ने यह भी दावा किया कि उसने अपनी संपत्ति में अनीता को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला किया था।

अदालत में सबसे विवादित दस्तावेज
मामले का सबसे पेचीदा पहलू एक कथित अनुबंध था। इस दस्तावेज में लिखा था कि अभय सिंह और अनीता पिछले लगभग 15 वर्षों से पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं। अभय की आय, चल-अचल संपत्ति और भविष्य की पेंशन में भी अनीता को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का उल्लेख था।
दस्तावेज पर दोनों की तस्वीरें और अनीता के हस्ताक्षर मौजूद थे। लेकिन अनीता ने अदालत में इस दस्तावेज को सिरे से खारिज कर दिया। उसका कहना था कि उसने कभी अभय से शादी नहीं की और न ही पति-पत्नी की तरह उसके साथ रही।
उसके अनुसार उससे बिना पढ़ाए हस्ताक्षर करवाए गए थे और कहा गया था कि ऐसा करने पर परिवार के खिलाफ दर्ज मामले खत्म करवा दिए जाएंगे।
नीलेश से शादी तय होने पर अभय सिंह बौखलाया
मामले में नया मोड़ तब आया जब अनीता की शादी बड़वानी निवासी नीलेश से तय हुई। अनीता का आरोप था कि यह खबर मिलते ही अभय सिंह बौखला गया। जहां भी शादी की बात आगे बढ़ती, वहां फोन कर देता।
लोगों से कहता कि अनीता उसकी पत्नी है। नीलेश को भी धमकी भरे फोन आए और शादी न करने की चेतावनी दी गई। नीलेश ने इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। बाद में यही रिकॉर्डिंग अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनीं। पुलिस ने पेन ड्राइव जब्त कर फॉरेंसिक जांच करवाई और रिकॉर्डिंग सुरक्षित की।
केस में देरी सबसे बड़ा सवाल बन गया
मामले में सबसे बड़ी चुनौती थी 2016 की कथित पहली घटना और 2024 में दर्ज एफआईआर के बीच लगभग आठ साल का अंतर। बचाव पक्ष ने इसी देरी को अपना सबसे मजबूत तर्क बनाया।
उनका कहना था कि यदि महिला पीड़ित थी तो उसने इतने वर्षों तक शिकायत क्यों नहीं की। दोनों के बीच लगातार संपर्क, यात्राएं, तस्वीरें और दस्तावेज इस बात की ओर संकेत करते थे कि रिश्ता पूरी तरह एकतरफा नहीं था।

अदालत ने 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का व्यवहार धमकीपूर्ण और मानसिक प्रताड़ना से भरा था। ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, धमकी भरे फोन कॉल, शादी रुकवाने की कोशिशें और निजी तस्वीरों के इस्तेमाल को अदालत ने गंभीर माना।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी था और उसने अपने पद तथा प्रभाव का इस्तेमाल कर महिला पर दबाव बनाया। बड़वानी की तृतीय अपर सत्र अदालत ने 31 जनवरी 2026 को डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खरारी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
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