भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तारापुर विधानसभा क्षेत्र के लखनपुर गांव निवासी सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना है। इसके साथ ही वे बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर दर्ज हुए हैं। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद तारापुर और लखनपुर समेत पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और पटाखे फोड़कर अपनी खुशी का इजहार किया। भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे
सम्राट चौधरी लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी संगठन क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत समन्वय और आम जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें एक अलग पहचान देता है। वे अपनी सादगी और जमीन से जुड़े स्वभाव के कारण जनता के बीच काफी लोकप्रिय हैं। तारापुर के लोगों ने इसे अपने क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके मुख्यमंत्री बनने से न केवल तारापुर बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। लोगों को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से काम होने की उम्मीद है। विकास और सुशासन को एक नई दिशा मिलेगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में विकास और सुशासन को एक नई दिशा मिलेगी। वे ओबीसी वर्ग के एक मजबूत चेहरे के रूप में उभरे हैं, जिससे राज्य के सामाजिक समीकरणों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सम्राट चौधरी तीन भाई में मंझले हैं
सम्राट चौधरी कद्दावर नेता शकुनी चौधरी और पूर्व विधायक पार्वती देवी के पुत्र है। सम्राट चौधरी तीन भाई में मंझले भाई है। बड़े भाई ई. रोहित चौधरी जो जदयू में है तो छोटे भाई धर्मेंद्र चौधरी है। उनकी तीन बहनें है। उनको परिवार के लोग प्यार से ‛गुल्लू’ कहकर बुलाते थे जबकि नानी उनको ‛लल्ला’ कहकर बुलाती थी। उन्होंने लखनपुर गांव के ही उर्दू मध्य विद्यालय में ककहरा सीखा। आगे की पढ़ाई वे महावीर चौधरी उच्च विद्यालय में आगे की। आरजेडी से की थी राजनीति की शुरुआत
16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश 1990 के दशक में राजद से किया था। राजद के बाद वे जदयू और फिर 2017 में नित्यानंद राय और केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें भाजपा में शामिल कराया। उन्हें 2018 में बिहार बीजेपी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। बिहार में भाजपा को मजबूत करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और वे कुर्मी-कुशवाहा समुदाय से एक मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं। ओबीसी चेहरा और बीजेपी के कद्दावर नेता
सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में एक प्रमुख ओबीसी चेहरा और बीजेपी के कद्दावर नेता हैं, जो वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं। सम्राट चौधरी कद्दावर नेता शकुनी चौधरी के पुत्र हैं और 1990 में सक्रिय राजनीति में आए चौधरी ने राजद और जदयू से होते हुए बीजेपी तक का सफर तय किया। वे राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे और परबत्ता से विधायक व विधान पार्षद रह चुके हैं। राबड़ी देवी सरकार में बागवानी मंत्री बने
1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि और बाद में मौसम विज्ञान व बागवानी मंत्री बने। उन्होंने 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। 2010 में बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक रहे। वे लगातार नीतीश कुमार की सरकारों में मंत्री रहे हैं, जिसमें 2014 में शहरी विकास व आवास विभाग जीतन राम मांझी सरकार में, 2021 में पंचायती राज मंत्री नीतीश सरकार के शामिल हुए।
2024 में उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री बने
2023 में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जिसके बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में 2024 में उपमुख्यमंत्री और वित्तमंत्री बने। 2025 में उन्होंने गृह क्षेत्र तारापुर विधानसभा से चुनाव लड़ा और उपमुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्री का भी पद मिला।
तारापुर विधानसभा 2025 में सम्राट चौधरी के स्टार प्रचारक होने के कारण पत्नी ममता कुमारी ने विधानसभा चुनाव में खुद कमान संभाली थी और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार किया और उनकी भारी बहुमत से जीत मिली। शकुनी चौधरी से पिता’ के तौर पर सवाल
सवाल: सम्राट बचपन में किस बात के लिए सबसे ज्यादा जिद करते थे? क्या उनके तेवर बचपन से ही ‘शासक’ जैसे थे?
जवाब: कहा कि बचपन में क्रिकेट खेलने को लेकर जिद करते थे। 1985 से ही वे राजनीतिक में सहयोग करने लगे थे। चुनाव में साईकल रैली,पैदल मार्च जैसे अन्य गतिविधियों में पूरा चुनाव संभालते थे।
सवाल: जब आपने उन्हें पहली बार राजनीति में उतारा, तो क्या कभी डर लगा कि वे आपकी विरासत संभाल पाएंगे?
जवाब: कहा कि वे युवा अवस्था मे ही समाजसेवा करते थे। चुनाव में उनके मेहनत और लगन को देखकर लगा कि उनकी रुचि राजनीति में है और मैने उन्हें चुनाव में उतारा और उन्होंने कड़ी मेहनत कर उसे सफल बनाया। सवाल: घर में सम्राट को सबसे ज्यादा डांट किस बात पर पड़ती थी? क्या आज भी वे आपसे सलाह लेकर ही बड़े फैसले लेते हैं?
जवाब: हंसते हुए कहा कि सबसे ज्यादा डांट पढ़ाई और क्रिकेट खेलने को लेकर ही पड़ती थी। अब तो वे हमसे आगे निकल चुके है। मै कभी उपमुख्यमंत्री नहीं बना। अब वे फैसला लेने के लिए खुद सक्षम है।
सवाल: आप फौज में थे, सम्राट को फौज में क्यों नहीं भेजा? क्या उन्हें ‘राजनीति का सिपाही’ बनाना पहले से तय था?
जवाब: कहा ऐसा नहीं है,मैंने देश और समाज की ज़रूरत के हिसाब से हर निर्णय लिया है। जब देश को मेरी ज़रूरत थी, तब मैं फौज में गया और युद्ध में हिस्सा लेकर देश की सेवा की। फिर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि राजनीति के माध्यम से समाज के बड़े तबके की सेवा और समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, इसलिए मैंने यह रास्ता चुना।
मेरे बेटे ने भी देश और समाज की ज़रूरत को समझते हुए राजनीति के माध्यम से सेवा करने का निर्णय लिया है। देश सेवा का तरीका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन उद्देश्य हमेशा एक ही होता है देश और समाज की भलाई। जिसमें वे उसमें सफल हुए है।
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