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कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आ गई है. ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज में असुरक्षा के भाव ने तेल की कीमतों को ऊपर उठा दिया है. भारत के क्रूड बास्केट का एवरेज प्राइस 108 डॉलर को पार कर गया है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर निकल गया है. कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है कि जल्द ही आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है.
जब भी तेल की कीमतों में आग लगती है भारत को ज्यादा परेशानी होती है.
नई दिल्ली. तेल मार्केटिंग कंपनियां हर दिन पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेलेंगी. मनीकंट्रोल ने एनालिस्ट्स के हवाले से लिखा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा तनाव बढ़ा है जिसकी वजह से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार कर गया है.कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनाने तक कंपनियों की इनपुट कॉस्ट एक बार फिर ऊपर चली गई लेकिन फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया. नतीजतन, इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम समेत अन्य तेल मार्केट कंपनियां घाटा झेल रही हैं.
भारत के लिए स्थिति चिंताजनक
जब भी तेल की कीमतों में आग लगती है भारत को ज्यादा परेशानी होती है. इसकी वजह यह है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है. देश की कुल तेल जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इम्पोर्ट किया जाता है. कच्चा तेल महंगा होना सिर्फ तेल कंपनियों पर बोझ नहीं बढ़ाता, वह भारत की डॉलर वाली तिजोरी पर भी असर डालता है. भारत को और डॉलर की जरूरत पड़ती है और इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर भी होता है. इसके अलावा आम लोगों के लिए तो यह सिरदर्द होता ही है. अगर कंपनियां बढ़ी हुई कॉस्ट का बोझ आम लोग पर ट्रांसफर करती हैं तो उनकी जेब खाली होती है. गौरतलब है कि भारत की क्रूड बास्केट 109 डॉलर प्रति बैरल है. रेटिंग एजेंसी ICRA के प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर पर कंपनियों का घाटा 200 रुपये पर पहुंच गया है. यानी आम आदमी को इस मोर्चे पर भी बुरी खबर सुनने को मिल सकती है.
मई में बढ़ी थी कीमतें
इससे पहले जब वेस्ट एशिया में स्थिति खराब हुई थी तो भारतीय तेल कंपनियों ने काफी लंबे समय तक बोझ झेला और फिर धीरे-धीरे दाम बढ़ाना शुरू किया. आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था. घरेलू एलीपीजी सिलेंडर के दाम में आखिरी बार 7 जून को 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी.
भारत का आयात बिल
पेट्रोल प्लानिंग एवं एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, भारत का क्रूड इम्पोर्ट बिल अप्रैल से जुलाई के बीच 56% से अधिक बढ़कर $63.4 अरब हो गया है. मजेदार बात यह है कि आयात की मात्रा करीब 82 मिलियन टन ही है. भारत के क्रूड बास्केट की औसत कीमत 102.11 डॉलर से बढ़कर 108.91 डॉलर हो गई है. जानकारों का मानना है कि तेल महंगा होगा तो व्यापार घाटा बढ़ेगा, रुपया कमजोर होगा, एविएशन, पेंट्स और टायर जैसे क्षेत्रों में मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो,…
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