Tuesday, October 6, 2026
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थप्पड़ कांड से बढ़ गया नगीना साहनी का राजनीतिक रसूख: शीर्ष नेतृत्व की नजर में आ गए; सहानुभूति मिली; टिकट की दावेदारी मजबूत हुई – Gorakhpur News




4 अक्टूबर को सपा की पत्रकारवार्ता में हुए थप्पड़ कांड ने किसी को फर्श पर पहुंचा दिया तो किसी के लिए अर्श पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस कांड के पीड़ित नगीना प्रसाद साहनी अपने राजनीतिक भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे लेकिन उनपर पड़े थप्पड़ ने अचानक उनका राजनीतिक रसूख बढ़ा दिया। गोरखपुर ग्रामीण सहित जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावशाली मौजूदगी रखने वाले निषाद समाज में उनको लेकर सहानुभूति पैदा हो गई। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट को लेकर उनकी दावेदारी पहले से थी लेकिन ऐसे कोई संकेत नहीं थे, जिससे उनकी दावेदारी को मजबूत माना जाता। लेकिन थप्पड़ कांड के बाद उनकी दावेदारी अब मजबूत हो गई है। राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आ चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने घर पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना और साथ ही उनके बढ़े कद और राजनीतिक महत्व की ओर इशारा भी कर दिया। इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि या तो नगीना साहनी को टिकट मिलेगा या फिर संगठन में कोई महत्वपूर्ण पद। पहले जानिए क्या था थप्पड़ कांड 4 अक्टूबर को सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम ने लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के अंतर्गत पत्रकारवार्ता की। इसमें सपा के प्रमुख नेताओं को बुलाया गया था। वहां पूर्व जिलाध्यक्ष एवं गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार नगीना प्रसाद साहनी भी पहुंचे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से तैयारी कर रहे अंशुमान सिंह को भी बुलाया गया था। अपराह्न 2 बजे के करीब वह भी अपने पुत्र कमलेश व समर्थकों के साथ प्रेसक्लब पहुंचे। नगीना प्रसाद साहनी, लोकसभा का चुनाव लड़ चुकीं काजल निषाद के बगल में बैठे थे। काजल व नगीना प्रसाद साहनी की कुर्सियों के बीच में थोड़ा गैप था। अंशुमान सिंह के लिए कुर्सी लगाने के लिए उनके पुत्र कमलेश सिंह ने नगीना प्रसाद साहनी को कुर्सी खिसकाने को कहा। जिसके बाद जगह न होने का हवाला दिया गया। इसी बात पर बहस शुरू हो गई। नगीना प्रसाद साहनी भी कुर्सी से खड़े हो गए। वीडियो में कमलेश भी उनके पास आते दिखे। वहां भी बहस हुई और फिर कमलेश ने नगीना को थप्पड़ मार दिया। इसी के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले में राजनीति शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में सपा प्रमुख ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाल दिया।
इधर अधिवक्ताओं के साथ नगीना प्रसाद साहनी कैंट थाने पहुंचे और अंशुमान, उनके पुत्र कमलेश सिंह एवं अन्य पर एफआईआर दर्ज कराई। अगले ही दिन अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला एवं महानगर कार्यकारिणी एवं सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया। मामला निषाद समाज से जुड़ा होने के कारण भाजपा भी इस मामले में कूद पड़ी है। भाजपा के कई नेताओं ने इसे सपा की अराजकता के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया है। इधर, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने भी सपा कार्यालय घेरने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद सपा प्रमुख ने गोरखपुर की जिला व महानगर कार्यकारिणियों को भंग कर दिया। इसी बीच संजय निषाद का सुल्तानपुर में संबोधन का एक वीडिया आया, जिसमें वह हाथ उठाने वालों का हाथ काटने की बात कर रहे हैं। क्षत्रिय समाज ने इसे खुद से जोड़कर देखा है। अब नगीना साहनी के बारे में जानिए निषाद समाज से आने वाले नगीना साहनी नौसढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमए एवं एलएलबी किया है। वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1998 में वह गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ में कला संकाय प्रतिनिधि रहे। 1999 में उन्होंने छात्र संघ उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2008 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। 2009 में उन्हें गोरखपुर ग्रामीण सीट का प्रभारी बनाया गया। 2010 से 2012 तक वह सपा के जिला महासचिव रहे। 2013 से 2016 तक जिला उपाध्यक्ष रहे। मार्च 2020 में पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। लेकिन 2021 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा प्रत्याशी के नामांकन न कर पाने के चलते उन्हें सितंबर 2021 में पद से हटा दिया गया। उसके बाद उनके पास संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं थी। 2027 चुनाव के लिए वह गोरखपुर ग्रामीण सीट से दावेदारी कर रहे हैं। डा. संजय निषाद के कदम से बढ़ा नगीना का कद इस घटना के तुरंत बाद निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने सपा को घेरना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे निषाद समाज पर हमला बताते हुए कार्रवाई न होने पर सपा मुख्यालय घेरने की चेतावनी दे दी। जिसके बाद पार्टी ने इस कांड के आरोपी अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाल दिया। अंशुमान भी गोरखपुर ग्रामीण से टिकट मांग रहे थे। उन्हें निकालने के साथ ही पार्टी ने निषाद समाज से आने वाले नगीना प्रसाद साहनी के साथ खुद को खड़ा दिखाया। संजय निषाद के बयानों का असर था कि डैमेज कंट्रोल के लिए सपा प्रमुख ने प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल को नगीना साहनी के घर भेजा। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुलाकात को संयोग से शिष्टाचार भेंट बताया था लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि यह सोची-समझाी रणनीति थी। अब नगीना के लिए कुछ बेहतर करके अखिलेश निषाद समाज को संदेश दे सकते हैं। जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार शफी आजमी का कहना है कि इस थप्पड़ कांड के बाद समाजवादी पार्टी के एक्शन ने PDA समाज को संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी किसी भी परिस्थिति में उनके साथ है। राजनीति में एक सही कदम अर्श तक पहुंचा देता है और एक गलत कदम फर्श पर पहुंचा देता है। इस कांड ने गोरखपुर राजनीति का सूरते हाल बदल दिया है। पीडीए समाज से होने के नाते निश्चित रूप से इसका फायदा नगीना साहनी को मिलेगा।



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