Last Updated:
भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया कि वैध यूडीआईडी या रियायती किराया पाने वाले दिव्यांग ही एसएलआरडी और एलएसएलआरडी कोच में बैठ सकेंगे, अनधिकृत यात्रियों पर सख्त कार्रवाई होगी. भारतीय रेलवे ने स्पष्टीकारण जारी किया है और इन कोचों में आम लोगों के बैठने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.
भारतीय रेलवे ने स्पष्ट निर्देश जारी किए. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने दिव्यांग यात्रियों के लिए जारी नियमों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. अब विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) धारक सभी दिव्यांगजन मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के आरक्षित SLRD (स्पेशल लोअर बर्थ दिव्यांग) और LSLRD कोचों में यात्रा कर सकेंगे. रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को सर्कुलर जारी कर मौजूदा नियम बताएं हैं. ये नियम क्या और दिव्यांगजन किस नियम के आधार पर सफर कर सकते हैं. आइए जानते हैं.
भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेनों के विशेष कोचों में केवल दो श्रेणियों के यात्रियों को ही ‘प्रामाणिक यात्री’ (बोनाफाइड) माना जाएगा. जिसमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPWD) द्वारा जारी वैध UDID कार्ड धारक दिव्यांगजन और वे दिव्यांगजन, जिन्हें भारतीय रेलवे द्वारा रियायती किराया (Concessional Fare) की सुविधा दी गई हो.
रेलवे ने साफ किया है कि इन दोनों श्रेणियों के दिव्यांग यात्रियों के पास यात्रा के दौरान अधिकार पत्र रखना अनिवार्य है. बिना टिकट या अधिकार पत्र के यात्रा करने वाले दिव्यांग यात्री भी इन कोचों में नहीं बैठ सकेंगे.
रेलवे ने दिव्यांगों के लिए आरक्षित इन कोचों में अनधिकृत यात्रियों के बैठने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है. बोर्ड ने सभी जोनों को निर्देश दिया है कि यदि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति इन SLRD या LSLRD कोचों में पाया गया तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम 1989 की संबंधित धाराओं के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया है ताकि वास्तविक दिव्यांग यात्रियों को अपनी आरक्षित सीट मिल सके और कोचों का दुरुपयोग रोका जा सके. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टीटीई और आरपीएफ को इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
अनधिकृत यात्रियों की अब खैर नहीं
रेलवे के अनुसार अकसर यह देखा जाता है कि दिव्यांगों के लिए आरक्षित इन कोचों में अन्य यात्री अवैध रूप से कब्जा कर लेते हैं. रेलवे ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि यदि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति इन कोचों में यात्रा करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध रेलवे अधिनियम 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

