नवादा के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान(DIET) में 3 दिसंबर 2025 को विश्व दिव्यांगता दिवस मनाया गया। शिक्षा विभाग, नवादा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से दिव्यांग बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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चित्रांकन से लेकर ब्रेल लेखन तक बच्चों की प्रतिभा चमकी
दिव्यांग बच्चों ने चित्रांकन, ब्रेल लिपि लेखन-वाचन, जलेबी दौड़, सैक रेस, पेंटिंग और गायन जैसी कई प्रतियोगिताओं में अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों के जोश और उत्साह ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी श्री शंभू शरण पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान मंच पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।इनमें जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग से श्री रितेश कुमार, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. राजकिशोर, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री दीपक कुमार, डीपीओ (स्थापना) श्री शिव कुमार शर्मा, डीपीओ (MDM) श्री रिशुराज और डीपीओ (SSA एवं E.E) सुश्री वर्षा ए. शामिल थे।
दिव्यांग बच्चों का भविष्य उज्ज्वल- मुख्य अतिथि
दीप प्रज्वलन के बाद श्री शंभू शरण पाण्डेय ने दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
शिक्षा विभाग हमेशा प्रतिबद्ध- D.E.O दीपक कुमार
इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री दीपक कुमार ने सभी अतिथियों और बच्चों का स्वागत व आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास और उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
KGBV की छात्राओं ने दिया स्वागत-गान, हुई गायन प्रतियोगिता
कार्यक्रम के दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) की दिव्यांग छात्राओं ने मनमोहक स्वागत-गान प्रस्तुत किया। इसके बाद गायन प्रतियोगिता ने बच्चों की कलात्मक क्षमता को नए आयाम दिए।
विजेताओं को मिला प्रमाणपत्र और उपहार
कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। डीपीओ सुश्री वर्षा ए. ने बच्चों को प्रमाणपत्र, जैकेट, स्टॉल और पेंसिल बॉक्स जैसे उपहार प्रदान किए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में कार्यक्रम प्रभारी श्री भारत भूषण पाण्डेय और सभी प्रखंडों के विशेष शिक्षकों का अहम योगदान रहा।

