नालंदा में 90 ग्रामीण सड़कों का होगा कायाकल्प।
नालंदा के पांच प्रखंडों में फैली जर्जर ग्रामीण सड़कों की दशा सुधारने की दिशा में एक पहल शुरू हो गई है। करीब 147 करोड़ रुपए की लागत से 90 ग्रामीण सड़कों का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा, जिससे तीन लाख से अधिक की आबादी को राहत मिलेगी।
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ग्रामीण कार्य विभाग के बिहारशरीफ डिविजन के अधिकारियों के अनुसार, इन सड़कों का मेंटेनेंस पीरियड पांच साल पहले खत्म हो चुका है। न्यू मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत करीब 166 किलोमीटर लंबी इन सड़कों को चकाचक बनाया जाएगा।
बिहारशरीफ प्रखंड में सबसे अधिक 31 सड़कों की मरम्मत
चयनित सड़कों का प्रखंडवार वितरण देखें तो बिहारशरीफ प्रखंड में सबसे अधिक 31 सड़कों की मरम्मत होगी। अस्थावां में 23, सरमेरा में 17, बिंद में 12 और रहुई प्रखंड में 6 ग्रामीण सड़कों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अनीश कुमार सिंह ने बताया कि 66 सड़कों के लिए टेंडर और एजेंसी चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। “जल्द ही कार्य एजेंसियों का चयन कर निर्माण काम शुरू हो जाएगा। सड़कें चिकनी होंगी तो लोगों के आने-जाने में काफी सहूलियत मिलेगी।
नई सड़कों का निर्माण भी होगा
मौजूदा सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ कुछ स्थानों पर नई सड़कों का निर्माण भी किया जाएगा। सरमेरा के बड़ी धरियारी से मानाचक, बिंद के बेनार-सकसोहरा रोड से महमुदाबाद और रहुई में एनएच-31 से पचौरी-रहुई बाजार तक नई सड़क बनेगी।
इसके अलावा एनएच-31 से तुंगी जाने वाली सड़क में एनएच-20 से एनएच- 82 बायपास तक व तुंगी सड़क से बड़ी दरगाह तक पथ का सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण का काम भी शामिल है।
तीन लाख से अधिक आबादी को मिलेगी सुविधा, 66 सड़कों के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में, 147 करोड़ होगा खर्च।
गड्ढों से परेशान हैं ग्रामीण
वर्तमान में इन सड़कों की स्थिति काफी खराब है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गए हैं। गांवों के आसपास कई जगहों पर घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर जमा रहता है, जिससे स्थिति और भी बदतर हो जाती है।
इन टूटी-फूटी सड़कों का खामियाजा वाहन चालकों और यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। दैनिक आवाजाही में होने वाली परेशानी से ग्रामीणों में काफी असंतोष है।
एक साल में दिखेगा बदलाव
अधिकारियों का कहना है कि एक साल के भीतर इन चिह्नित सड़कों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। चिकनी सड़कों पर गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी और यात्रियों को हिचकोले नहीं खाने पड़ेंगे।

