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मोबाइल नेटवर्क, कॉल ड्रॉप और इंटरनेट स्पीड जैसी समस्याओं से परेशान ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की तैयारी हो रही है. टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने नया ड्राफ्ट नियम जारी किया है, जिसके तहत शिकायतों को गलत तरीके से बंद करने या ठीक से हल नहीं करने पर टेलीकॉम कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. नियम लागू होने पर कंपनियों को हर शिकायत की अपडेट भी ग्राहक को देनी होगी. ट्राई के प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई कंपनी शिकायत या अपील को गलत तरीके से खारिज करती है तो उस पर प्रति मामले हजारों रुपये का जुर्माना लगेगा. वहीं एक तिमाही में यह जुर्माना 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. नए नियमों का मकसद ग्राहकों के लिए शिकायत दर्ज करना आसान बनाना और टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाना है.
ऐप और चैटबॉट पर आसानी से शिकायत दर्ज करने की सुविधा देनी होगी. (AI)
नई दिल्ली. मोबाइल नेटवर्क, कॉल ड्रॉप और खराब इंटरनेट स्पीड जैसी समस्याओं को लेकर अक्सर ग्राहक परेशान रहते हैं. कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी सही जवाब नहीं मिलता या कंपनियां बिना समाधान दिए शिकायत बंद कर देती हैं. अब ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई (TRAI) ने नए सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा है. ट्राई ने गुरुवार को टेलीकॉम कंज्यूमर्स कंप्लेंट रिड्रेसल रेगुलेशन 2026 का ड्राफ्ट जारी किया. इसमें कहा गया है कि अगर कोई टेलीकॉम कंपनी ग्राहक की शिकायत या अपील को गलत तरीके से बंद करती है या संतोषजनक समाधान नहीं देती, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. एक तिमाही में यह जुर्माना 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अगर शिकायत ऑडिट के दौरान यह पाया जाता है कि किसी ग्राहक की शिकायत को गलत तरीके से खारिज किया गया या ठीक से हल नहीं किया गया, तो कंपनी पर प्रति शिकायत 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं अगर किसी अपील को गलत तरीके से बंद किया गया तो कंपनी को हर मामले में 5000 रुपये का जुर्माना भरना होगा. ट्राई ने साफ कहा है कि एक लाइसेंस क्षेत्र में यह जुर्माना अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति तिमाही तक हो सकता है.
वेबसाइट और ऐप पर शिकायत का विकल्प
ट्राई ने प्रस्ताव दिया है कि हर टेलीकॉम कंपनी को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और चैटबॉट पर साफ और आसान शिकायत दर्ज करने की सुविधा देनी होगी. ग्राहक शिकायत, अपील, सर्विस रिक्वेस्ट और सामान्य सवालों के लिए अलग अलग विकल्प चुन सकेंगे. अगर ग्राहक को सही विकल्प नहीं मिलता है तो उसे टेक्स्ट लिखकर या वॉइस नोट भेजकर अपनी समस्या बताने का विकल्प भी देना होगा.
शिकायत की हर अपडेट देनी होगी
नए प्रस्ताव के तहत कंपनियों को ग्राहकों को शिकायत की स्थिति, उस पर हुई कार्रवाई और समाधान में लगने वाले समय की जानकारी लगातार देनी होगी. यानी अब शिकायत दर्ज करने के बाद ग्राहक को अंधेरे में नहीं रखा जा सकेगा. यह जानकारी मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए तब तक दिखानी होगी जब तक शिकायत पूरी तरह हल नहीं हो जाती.
वेबसाइट पर बनाना होगा ‘कंज्यूमर कॉर्नर’
ट्राई ने यह भी कहा है कि सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपनी वेबसाइट के होमपेज पर एक खास “कंज्यूमर कॉर्नर” बनाना होगा. इसमें शिकायत केंद्र, अपीलीय प्राधिकरण, ग्राहक संतुष्टि सर्वे और तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट जैसी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. इस कदम का मकसद कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाना और ग्राहकों को ज्यादा पारदर्शिता देना है.
5 जून तक मांगे गए सुझाव
ट्राई ने इस ड्राफ्ट रेगुलेशन पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं. इसके लिए 5 जून 2026 तक का समय दिया गया है. सुझावों और प्रतिक्रियाओं के बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे. अगर यह नियम लागू होते हैं तो जियो (Jio), एयरटेल (Airtel), वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) और बीएसएनएल (BSNL) जैसी कंपनियों को ग्राहक शिकायत निपटान सिस्टम में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

