Last Updated:
जयशंकर ने हिंद महासागर के कई देशों के विदेश मंत्रियों की मौजूदगी में कहा, ‘यह आवश्यक है कि नौवहन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे. यहां प्रासंगिक बात यह है कि हम सभी ने इस संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को बहुत गहराई से महसूस किया है.’ जयशंकर ने कहा कि जब ऊर्जा महंगी होती है, तो इसका पूरे समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन में व्यवधान को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं. हालांकि, ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है.
जयशंकर ने कहा कि समुद्री रास्तों पर नेविगेशन रुकना बहुत खतरनाक है.
पोट लुईस. हिंद महासागर अब सिर्फ पानी का इलाका नहीं, बल्कि आने वाले समय का सबसे बड़ा ‘रणभूमि’ बनने जा रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को साफ चेतावनी दी है कि आने वाले दिन उथल-पुथल भरे होंगे, लेकिन उम्मीद की किरण भी बनी रहेगी. जयशंकर ने दो टूक कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टेंशन अब समुद्री चोक प्वॉइंट्स को लेकर है – वो संकरे रास्ते जहां से वैश्विक व्यापार की सांस चलती है. अगर ये रुके, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था घुट जाएगी.
हिंद महासागर सको को ‘ग्लोबल साउथ का महासागर’ बताते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि अब असली खेल यहीं होगा. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है, जिससे हर देश आर्थिक झटके झेल रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यह अब कोई छोटा टकराव नहीं, बल्कि ‘विस्तृत संघर्ष’ बन चुका है, जिसका असर कई देशों तक फैल चुका है. ऐसे में समुद्री रास्तों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही अब सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि ‘जीवनरेखा’ बन गई है.
जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में QUAD की भूमिका आज पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण है. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह गठजोड़ अब इस क्षेत्र में स्थिरता का बड़ा स्तंभ बन रहा है. साथ ही भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेलते हुए घोषणा की – 2027 में वह Indian Ocean Conference की मेजबानी करेगा. यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की बढ़ती ताकत और नेतृत्व का खुला ऐलान है.
भारत ने पश्चिम एशिया में शांति की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकट को ‘चिंताजनक’ बताया और नागरिकों, बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार मार्गों को निशाना बनाने के खिलाफ भारत के अडिग रुख को रेखांकित किया. जयशंकर ने हिंद महासागर सम्मेलन में अपने संबोधन में संघर्ष के आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की.
विदेश मंत्री की यह टिप्पणियां उस पृष्ठभूमि में आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, खासकर लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद. उन्होंने कहा, “हम सभी इस संघर्ष को लेकर बेहद चिंतित हैं और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल होते देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा, “हम नागरिकों, बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का कड़ा विरोध करते हैं.”
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

