जो चेहरा आम-सा लगता है, वही अगर दुश्मन की आंख बन जाए तो खतरा कहीं बड़ा हो जाता है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मेवात से एक ऐसे गद्दार चेहरे को बेनकाब किया है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत में स्लीपर सेल तैयार कर रहा था. गिरफ्तार आरोपी का नाम कासिम है, जो राजस्थान के भरतपुर का रहने वाला है. लेकिन उसकी वफादारी भारत के लिए नहीं, पाकिस्तान के लिए थी. दो बार सीमा पार कर पाकिस्तान गया, और वहां ISI से ट्रेनिंग लेकर लौटा — पूरी तरह तैयार एक हार्डकोर जासूस.
कैसे खुली देशद्रोह की ये परत?
पिछले साल सितंबर 2024 में सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला कि कुछ भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल पाकिस्तान में मौजूद ISI ऑपरेटिव्स कर रहे हैं. ये सिम कार्ड भारत से भेजे गए थे, जिनका इस्तेमाल व्हाट्सएप कॉल्स और चैट्स के जरिए भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों की संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए हो रहा था. जांच के दौरान कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और आखिरकार कासिम नाम सामने आया.
ISI से मिला स्पेशल टास्क
जांच में पता चला कि कासिम अगस्त 2024 और मार्च 2025 में दो बार पाकिस्तान गया. वहां ISI एजेंट्स ने उसे स्पेशल ट्रेनिंग दी. स्लीपर सेल की भर्ती कैसे करनी है? सैन्य ठिकानों की रेकी कैसे करनी है? भारतीय मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल कर कैसे खुफिया जानकारी चुरानी है? कैसे भारत में आतंकी गतिविधियों की नींव रखनी है? ISI की नजर में कासिम ‘ट्रस्टेड एसेट’ बन चुका था. उसे भारत में पैन इंडिया मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
मोबाइल नंबरों के पीछे की गहरी साजिश
कासिम ने भारत में फर्जी डॉक्यूमेंट से सिम कार्ड खरीदे और उन्हें पाकिस्तान भेजा. इन नंबरों से पाकिस्तान की ISI भारतीय सेना और सरकारी अधिकारियों से संपर्क कर रही थी. यह एक डिजिटल घुसपैठ थी, जिससे सुरक्षा तंत्र की नींव को हिला दिया जा सकता था.
क्या कर रहा था सीरियल ब्लास्ट की प्लानिंग?
दिल्ली पुलिस को संदेह है कि कासिम सिर्फ जानकारी जुटा ही नहीं रहा था, बल्कि एक स्लीपर सेल तैयार कर रहा था, जिसका मकसद सीरियल ब्लास्ट जैसी वारदातों को अंजाम देना हो सकता था. पूछताछ में कुछ नाम और लोकेशन सामने आए हैं, जिनकी जांच अब एजेंसियां कर रही हैं.
कैसे पहुंचा पुलिस के हत्थे?
स्पेशल सेल ने कासिम को हरियाणा के मेवात से गिरफ्तार किया, जहां वह पिछले कुछ महीनों से छिपा हुआ था. उसके पास से मोबाइल, फर्जी दस्तावेज, और कुछ संदिग्ध डिजिटल डिवाइसेज़ बरामद किए गए हैं. अब कासिम पुलिस रिमांड में है, और उससे पूछताछ जारी है.
देश की सुरक्षा को सीधी चुनौती
दिल्ली पुलिस का साफ कहना है कि कासिम का मामला सिर्फ जासूसी नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा पर सीधा हमला था. जो जानकारी अब तक सामने आई है, वो बताती है कि पाकिस्तान किस तरह भारत के भीतर ही अपने एजेंट बिठाकर यहां अराजकता फैलाना चाहता है.

