Sunday, April 12, 2026
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पाक के दो यार, दोनों लाचार, भारतीयों ने सिखाया ऐसा सबक, होने लगा तगड़ा नुकसान


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Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के बाद तुर्की और अजरबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इससे दोनों देशों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान का साथ देने वाले तुर्की और अजरबैजान को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. (सांकेतिक तस्‍वीर)

Operation Sindoor: पाकिस्तान का साथ देना तुर्की और अजरबैजान को भारी पड़ गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय पर्यटकों ने दोनों देशों से दूरी बना ली है. मई से अगस्त 2025 के बीच अजरबैजान जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में 56 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि तुर्की में यह गिरावट 33.3 प्रतिशत रही है. यह दोनों देशों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में ये भारतीय यात्रियों के बीच तेजी से पॉपुलर डेस्टिनेशन बन गए थे.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पक्ष में खुलकर बयान देने और कूटनीतिक समर्थन करने वाले तुर्की और अजरबैजान की इस भूमिका से भारतीय जनमानस में नाराजगी फैल गई थी. तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोआन और अजरबैजान सरकार द्वारा इस्लामाबाद के समर्थन में दिए गए बयानों के बाद सोशल मीडिया पर इन देशों के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ने लगी.

ट्रैवल कंपनियों ने दिखाई सख्ती

इस बहिष्कार का असर भारत की पर्यटन इंडस्ट्री में भी साफ दिखा. कई प्रमुख ट्रैवल प्लेटफॉर्म जैसे MakeMyTrip और EaseMyTrip ने तुर्की और अजरबैजान की “गैर-जरूरी यात्राओं” से बचने की सलाह दी. कुछ ट्रैवल एजेंसियों ने तो इन देशों के लिए पैकेज टूर और होटल बुकिंग तक अस्थायी रूप से रोक दी. कई यात्रियों ने पहले से की गई बुकिंग रद्द कर दी, जिससे इन देशों के पर्यटन राजस्व पर असर पड़ा.

लोकप्रियता में आई गिरावट

पिछले कुछ वर्षों में तुर्की और अजरबैजान भारतीय पर्यटकों के बीच तेजी से उभरते गंतव्य बने थे. इस्तांबुल का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यूरोप और पश्चिम एशिया की यात्राओं के लिए ट्रांजिट हब के रूप में लोकप्रिय था, जबकि बाकू भारतीय यात्रियों के लिए नया आकर्षण बनकर उभरा था. लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान इन दोनों देशों की राजनीतिक स्थिति ने भारतीय बाजार में उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है.

सॉफ्ट डिप्लोमेसी का असर

पर्यटन विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट केवल राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि सॉफ्ट डिप्लोमेसी के असर की भी मिसाल है. भारत अब अपने नागरिकों की भावनाओं के साथ चल रहे आर्थिक और पर्यटन संबंधों को जोड़कर देख रहा है — और तुर्की व अजरबैजान के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि भारत विरोधी रुख के आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं.

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Manish Kumar

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