Friday, May 29, 2026
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फिशिंग से लेकर स्किमिंग तक, ये 5 बैंकिंग फ्रॉड खाली कर सकते हैं खाता, ऐसे बचें


नई दिल्ली. आज के दौर में ऑनलाइन पैसे भेजना, यूपीआई पेमेंट करना और मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करना हमारी आदत बन चुका है. इसने हमारी जिंदगी को बेहद आसान और फास्ट बना दिया है. लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ा है, वैसे-वैसे देश में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. ठग हर दिन लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाने के नए-नए पैंतरे ढूंढ रहे हैं .ऐसे में जागरूक रहना और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी हो गया है.

तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड, ऐसे रहें सेफ (फोटो- एआई)

डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड एक तरह की ऑनलाइन चोरी है. इसमें साइबर अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके सीधे-साधे लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ाते हैं या उनकी जरूरी बैंकिंग डिटेल्स चुरा लेते हैं. ये ठग फर्जी कॉल, नकली लिंक्स, हूबहू दिखने वाली नकली वेबसाइट्स और वायरस वाले ऐप्स के जरिए लोगों को फंसाते हैं. इनका मुख्य मकसद आपसे आपका ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन हासिल करना होता है.

इन 5 तरीकों से आपको जाल में फंसाते हैं ठग

1. फिशिंग स्कैम: इसमें ठग आपको वाट्सऐप, ईमेल या एसएमएस पर बैंक या किसी बड़ी कंपनी के नाम से फर्जी लिंक भेजते हैं. जैसे ही आप उस लिंक को खोलकर अपनी बैंकिंग डिटेल्स डालते हैं, आपका पासवर्ड और ओटीपी उनके पास चला जाता है और बैंक खाता खाली हो जाता है.

2. यूपीआई फ्रॉड: इस खेल में ठग आपको पैसे भेजने का लालच देकर एक ‘पेमेंट रिक्वेस्ट’ भेजते हैं. जैसे ही आप उस रिक्वेस्ट को अप्रूव करके अपना यूपीआई पिन डालते हैं, पैसे आपके खाते में आने के बजाय ठग के खाते में चले जाते हैं.

3. ओटीपी फ्रॉड: ठग बैंक अधिकारी बनकर आपको फोन करते हैं और कहते हैं कि ‘आपका क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने वाला है’ या ‘आपको बड़ा ऑफर मिला है.’ वेरिफिकेशन के नाम पर वो आपसे तुरंत ओटीपी मांगते हैं और आपके बताते ही पैसे गायब हो जाते हैं.

4. कार्ड स्किमिंग: जब आप एटीएम या किसी दुकान पर कार्ड स्वाइप करते हैं, तो ठग वहां मशीनों में एक छोटी सी खुफिया डिवाइस (स्किमर) लगा देते हैं. यह डिवाइस आपके कार्ड का सारा डेटा कॉपी कर लेती है, जिससे बाद में नकली कार्ड बनाकर आपके पैसे निकाल लिए जाते हैं.

5. फर्जी लोन और कैशबैक ऑफर्स: पैसों की इमरजेंसी का फायदा उठाने के लिए ठग सोशल मीडिया पर सस्ते लोन या भारी कैशबैक के विज्ञापन चलाते हैं. जब आप उनके फर्जी ऐप को डाउनलोड करते हैं, तो वो लोन देने के बहाने आपकी सारी बैंकिंग जानकारी चुरा लेते हैं.

इन 5 बातों का रखें ध्यान, कभी नहीं डूबेगा पैसा:

  • अपना ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या एटीएम पिन कभी भी, किसी भी हालत में किसी को न बताएं. बैंक कभी भी फोन पर ये जानकारियां नहीं मांगता.
  • किसी भी लिंक पर अपनी बैंकिंग डिटेल्स डालने से पहले अच्छी तरह जांच लें कि वेबसाइट असली है या नकली.
  • अपने बैंकिंग ऐप्स के लिए मजबूत पासवर्ड रखें और ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ हमेशा ऑन रखें.
  • रेलवे स्टेशन, कैफे या मॉल के फ्री Wi-Fi पर कभी भी गूगल पे, फोन पे या नेट बैंकिंग का इस्तेमाल न करें। हमेशा अपने मोबाइल डेटा का ही इस्तेमाल करें.
  • अपने बैंक स्टेटमेंट और एसएमएस अलर्ट्स पर लगातार नजर रखें ताकि कोई भी संदिग्ध लेनदेन होते ही आपको तुरंत पता चल जाए.

अगर ठगी हो जाए, तो क्या करें?
अगर भगवान न करे आप किसी ऐसे फ्रॉड का शिकार हो जाएं, तो बिल्कुल घबराएं नहीं. शांत रहें और सबसे पहले अपने बैंक को कॉल करके अपना अकाउंट और कार्ड ब्लॉक कराएं. सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल https://www.cybercrime.gov.in/ पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं. आप तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा नजदीकी पुलिस स्टेशन के साइबर सेल को भी इसकी जानकारी दें.



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