भारत में हजारों वॉट्सऐप अकाउंट पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मेटा के इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने इस साल शुरुआती 12 हफ्तों में 9,400 से ज्यादा वॉट्सऐप अकाउंट को ब्लॉक किया है। इनमें से ज्यादातर वॉट्सऐप अकाउंट का कंबोडिया से कनेक्शन है। सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने वॉट्सऐप अकाउंट बैन करने से जुड़ी जानकारी दी है।
कंबोडिया से हो रहे थे ऑपरेट
मेटा के इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने जांच में पाया कि भारतीय यूजर्स को निशाना बनाने वाले ज्यादातर अकाउंट्स दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर कंबोडिया में मौजूद स्कैम सेंटर से ऑपरेट किए जा रहे थे यानी भारत में जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम का जाल बिछाया गया था, वो कंबोडिया में मौजूद अकाउंट्स के जरिए चलाया जा रहा था।
डिजिटल अरेस्ट करने वाले ज्यादातर हैकर्स दिल्ली पुलिस, मुंबई पुलिस, CBI या ATS डिपार्टमेंट के नाम पर लोगों को डराते-धमकाते थे और उनके साथ फ्रॉड करते थे। वॉट्सऐप की टीम ने इन अकाउंट्स का पता लगाया और उनपर ये बड़ी कार्रवाई की है। हैकर्स सरकारी विभाग के नाम का इस्तेमाल इसलिए करते थे ताकि लोगों को उनपर शक नहो।
सरकारी विभाग की मदद से बड़ी कार्रवाई
WhatsApp ने बताया कि हैकर्स से यूजर्स को बचाने के लिए नए इन्फोर्समेंट टूल्स यूज किए गए हैं। इसमें कंपनी ने गृह मंत्रालय के साइबर सिक्योरिटी विंग I4C (साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर), MeitY और दूरसंचार विभाग (DoT) से मिली जानकारी के मुताबिक कार्रवाई की है। दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल का भी इसमें अहम योगदान रहा है। कई यूजर्स ने इन अकाउंट्स के बारे में यहां रिपोर्ट किया था। अलग-अलग शिकायतों के आधार पर इन वॉट्सऐप अकाउंट को बैन किया गया है।
सिम बाइडिंग की तैयारी
सरकार भारत में डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए सोशल मीडिया ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग की तैयारी की है। इसे लेकर WhatsApp ने अपनी सहमति जताई है। सिम बाइंडिंग लागू होने पर वॉट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया ऐप उन्हीं फोन में यूज किए जा सकेंगे, जिनमें उसका नंबर लगा होगा जैसा कि UPI ऐप के साथ होता है।
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