Tuesday, May 19, 2026
Homeराज्यमध्यप्रदेशएमपी से 24 मई को दिल्ली जाएंगे 10 हजार आदिवासी: जनजातीय...

एमपी से 24 मई को दिल्ली जाएंगे 10 हजार आदिवासी: जनजातीय सांस्कृतिक समागम में अमित शाह भी होंगे शामिल – Bhopal News




देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला मैदान एक बार फिर बड़े आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। 24 मई को आयोजित होने वाले ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इस समागम में देशभर के आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे। इस महारैली में सबसे बड़ी भागीदारी मध्य प्रदेश की होगी, जहां से 10,000 से अधिक जनजातीय बंधु दिल्ली कूच कर रहे हैं। कार्यक्रम में ये होंगे शामिल केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि एमपी से दिल्ली के लिए ट्रेनों में कराए टिकट बुक मध्य प्रदेश के महाकौशल, मालवा और निमाड़ अंचलों से आदिवासियों को दिल्ली पहुंचाने के लिए ट्रेनों में रिजर्वेशन की व्यवस्था की गई है। जनजातीय सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि गांव-गांव में जनसंपर्क कर लोगों को इस मुद्दे की गंभीरता समझाई गई है। एमपी से जाने वाले हजारों आदिवासी अपने साथ पारंपरिक वाद्ययंत्र और वेशभूषा भी लेकर जाएंगे, ताकि दिल्ली की सड़कों पर जनजातीय संस्कृति की अनूठी झलक दिखाई दे। डी-लिस्टिंग की आदिवासी समुदाय उठा रहा मांग मप्र सहित देश भर के अलग-अलग राज्यों में आदिवासी समाज के कई संगठन डी-लिस्टिंग की मांग उठा चुके हैं। दिल्ली में होने वाले जनजातीय सांस्कृतिक समागम में भी यह मुद्दा उठ सकता है। क्या है ‘डी-लिस्टिंग’ की मांग और क्यों मचा है बवाल? संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की मांग: जनजातीय सुरक्षा मंच का कहना है कि अनुच्छेद 341 के तहत अगर कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति धर्मांतरण करता है, तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। लेकिन अनुच्छेद 342 में जनजातियों (ST) के लिए ऐसा कड़ा प्रावधान न होने के कारण धर्मांतरण का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ‘डबल बेनिफिट’ पर रोक: रैली का मुख्य एजेंडा उन लोगों को सूची से बाहर करना है जो ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद भी जनजातीय कोटे से आरक्षण (ST) और अल्पसंख्यक (Minority) का दोहरा लाभ उठा रहे हैं। संस्कृति का संरक्षण: पोस्टर में सीधे तौर पर कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने पुरखों की आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों को त्याग चुका है, उसे जनजातीय कहलाने का हक नहीं है। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी और शक्ति प्रदर्शन लाल किला मैदान में होने वाले इस ‘सांस्कृतिक महाकुंभ’ में मुख्य अतिथि के रूप में देश के गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी प्रस्तावित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत करेंगे। साथ ही पूर्व संयोजक हर्ष चौहान, राजकिशोर हांसदा और डॉ. कार्तिक उरांव के सिद्धांतों को मानने वाले देशभर के प्रतिनिधि इस मंच पर जुटेंगे। शोभायात्रा से शुरू होगा हुंकार का सिलसिला 24 मई की शाम 6 बजे मुख्य कार्यक्रम से पहले दिल्ली के पांच अलग-अलग मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें भारत की विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधि अपनी पारंपरिक पोशाक और लोकगीतों के साथ शामिल होंगे। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि इस बात का संकल्प है कि जनजातीय समाज अब अपनी जड़ों और अधिकारों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments