Wednesday, September 9, 2026
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बाढ़ के पानी में डूबी कार, 2 की मौत: परिजनों का आरोप- प्रशासन की लापरवाही से गई जान, कानपुर में सड़क पर नहर नहीं दिखी – Kanpur News




कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में बाढ़ के पानी से उफनाई पांडु नहर में कार पलटने से दो युवकों की मौत के मामले में बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने हादसे के लिए सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि नहर का पानी सड़क के ऊपर तक भर गया था और सड़क व नहर का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बावजूद न तो मौके पर बैरिकेडिंग की गई और न ही रास्ता बंद कराया गया। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी भी तैनात नहीं किए गए। परिजनों का आरोप है कि प्रशासन की इसी लापरवाही ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। हादसे में सुरार गांव निवासी दीपक पाण्डेय (28) और उसके दोस्त अंकित कमल (28) की मौत हुई है। दोनों सोलर पैनल लगाने का काम करते थे। मंगलवार देर रात नहर में डूबी कार मिलने के बाद पुलिस ने स्टीमर और गोताखोरों की मदद से दोनों युवकों के शव कार से करीब 200 मीटर दूर से बरामद किए थे। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया था। किसान से सोलर पैनल लगाने की बात करने निकले थे दोनों सुरार गांव निवासी राकेश पाण्डेय किसान हैं। परिवार में पत्नी बिट्टून देवी और बेटे दीपक व उत्तम हैं। राकेश ने बताया कि दीपक की करीब दो साल पहले शादी हो गई थी दीपक की पत्नी श्रष्टि एक साल का बेटा बउआ है। दीपक अपने दोस्त अंकित कमल के साथ सोलर पैनल लगाने का काम करता था। अंकित के पिता शिवनारायण कमल किसान हैं और वह परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें नेहा और नीतू हैं। अंकित मूलरूप से रूरा, कानपुर देहात का रहने वाला था और कल्याणपुर के आवास विकास-3 में किराये का कमरा लेकर सोलर पैनल का कारोबार करता था। परिजनों के मुताबिक सोमवार देर रात दोनों बचउपुर गांव के पास एक किसान से सोलर पैनल लगाने की बात करने जा रहे थे। अंकित अपनी पंच कार से दीपक को लेने उसके घर पहुंचा था। दोनों ने परिवार वालों से करीब आधे घंटे में लौटने की बात कही और कार से निकल गए। नहर पुलिया पार करते समय बाढ़ के पानी ने निगली कार परिजनों के मुताबिक दोनों बचउपुर नहर के पास पहुंचे तो सड़क पर बाढ़ का पानी भरा था। नहर का पुल भी पानी में डूबा हुआ था। सड़क और नहर का पानी एक जैसा दिखाई देने के कारण दोनों कार लेकर आगे बढ़ गए। इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर पांडु नहर में पलट गई। नहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण कार काफी दूर तक बहती चली गई। उधर, काफी देर तक दोनों के घर वापस न लौटने पर परिजनों ने फोन किया, लेकिन दोनों के मोबाइल बंद मिले। सुबह तक कोई जानकारी न मिलने पर परिवार वालों ने खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद भी दोनों का पता नहीं चला तो मंगलवार को परिजन सचेंडी थाने पहुंचे और दोनों की गुमशुदगी दर्ज कराई। ग्रामीणों ने नहर में डूबी कार देखी तो खुला हादसे का राज मंगलवार देर रात करीब साढ़े दस बजे ग्रामीणों की नजर नहर में डूबी एक कार पर पड़ी। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। सचेंडी पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन की मदद से कार को बाहर निकलवाया। कार की पहचान अंकित की होने पर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। नहर में कार देखकर उनके होश उड़ गए। दोनों युवकों के शव तत्काल बरामद न होने पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क पर बैठकर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते खोजबीन और बचाव कार्य तेज किया जाता तो शायद युवकों की जान बच सकती थी। तीन थानों की फोर्स के साथ पहुंचे अधिकारी, गोताखोरों ने निकाले शव हंगामे की सूचना पर एसीपी पनकी अमित चौरसिया, एसडीएम सदर अभिनव सिंह समेत तीन थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद नहर में स्टीमर उतारा गया और गोताखोरों की मदद से तलाश शुरू की गई। देर रात दोनों युवकों के शव कार से करीब 200 मीटर दूर बरामद कर लिए गए। शव देखते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। ‘बैरिकेडिंग होती तो नहीं होता हादसा’ बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मृतकों के परिजनों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना था कि नहर में बाढ़ का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था। पानी इतना अधिक था कि सड़क और नहर का पता ही नहीं चल रहा था। इसके बावजूद प्रशासन ने वहां बैरिकेडिंग नहीं कराई और न ही आवागमन रोकने के लिए कोई इंतजाम किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बाढ़ की स्थिति पहले से बनी हुई थी, इसके बावजूद खतरनाक स्थान पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाया गया और न ही पुलिसकर्मी तैनात किए गए। यदि समय रहते रास्ता बंद कर दिया जाता या बैरिकेडिंग कर दी जाती तो दोनों युवक कार लेकर वहां नहीं पहुंचते और यह हादसा टल सकता था। शव रखकर नौकरी और मुआवजे की मांग हादसे के बाद परिजनों ने मृतकों के परिवार को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की। उनका कहना था कि दोनों परिवारों की जिम्मेदारी युवकों पर थी। अचानक हुई मौत से परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। एसडीएम सदर अभिनव सिंह ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और नियमानुसार सरकारी नौकरी व उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए। रोती-बिलखती मां बोली- अंकित घर कब आओगे पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे अंकित की मां अपने इकलौते बेटे की मौत से बेहाल हो गई वह रोते हुए बोली की अंकित ने रात में फोनकर कर कहा था मम्मी मै एक घंटे में मै गाँव आ रहा हु खाना घरपर खाऊंगा आकर। सोना मत एक किसान से पैनल लगने की बात करके वापस आ रहा हु। माँ बोली मै देर रात एक दरवाजा खोलकर देखती रही रही की मेरा बेटा आ रहा होगा उनको नहीं पता था की बेटा अब कभी नहीं आएगा। यह सुनकर अन्य लोगों के भी आंखों से आंसू निकलने लगे। आखिर इन सवालों के कौन देगा जवाब? दो मौतों ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जब नहर का पानी सड़क पर चढ़ चुका था और रास्ता जानलेवा हो गया था, तो वहां सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? बैरिकेडिंग और रास्ता बंद करने की कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं हुई? अब हादसे के बाद इन सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों से मांगे जा रहे हैं।



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