बिजली चोरी रोकते हैं स्मार्ट प्रीपेड मीटर (सांकेतिक तस्वीर)
लेकिन प्रीपेड मीटर एक क्रांति की तरह हैं. अभी चूंकि लोगों को इन मीटरों की आदत नहीं हुई है, इस वजह से लोगों को प्रीपेड मीटर खराब लग रहे हैं. हालांकि एक एक्सपर्ट के तौर पर देखा जाए तो नुकसान सिर्फ मानसिक है. वास्तविकता में प्रीपेड मीटरों का कोई नुकसान नहीं है. इससे कंपनियों को तो फायदा है ही उपभोक्ताओं को भी दोहरा लाभ है.
डॉ. भूषण कहते हैं कि ग्राहकों को इससे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में फायदा मिलेगा.
क्या हैं प्रीपेड मीटरों के शॉर्ट टर्म फायदे
क्या हैं लॉन्ग टर्म में फायदे
भूषण कहते हैं कि बहुत सारी भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है. बिजली के प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर मोबाइल सिम की तरह ही हैं और दोनों ही सिम आज बखूबी चल रही हैं. बहुत सारे लोगों को प्रीपेड सिम ज्यादा फायदेमंद लगती हैं.
प्रीपेड या पोस्टपेड कौन से मीटर ज्यादा फायदेमंद.
आने वाले समय में जब लोगों को इन मीटरों की आदत पड़ेगी तो उन्हें इनके फायदे नजर आएंगे. कहीं भी तब तकनीक आती है और पूरा शिफ्ट होता है तो ये चुनौतियां सामने आती हैं. हालांकि प्रीपेड मीटर भविष्य के लिए बेहतर हैं और तकनीकी रूप से बेहद मजबूत हैं.
आइए जानते हैं उनसे सवालों के जवाब
क्या प्रीपेड मीटर से बिजली चोरी रुकती है?
हां प्रीपेड मीटर पूरी तरह स्मार्ट मीटर हैं और इनसे बिजली की चोरी रुकेगी, ऐसी उम्मीद है.
ये मीटर कैसे काम करते हैं?
प्रीपेड मीटर मोबाइल फोन की प्रीपेड सिम की तरह काम करते हैं. पहले भुगतान करिए फिर उसके हिसाब से बनी यूनिटों का उपभोग करिए.अगर आप भुगतान से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो आपकी बिजली कट जाएगी.
इन मीटरों का फायदा क्या है?
इन मीटरों से उपभोक्ता को पता चलता है कि उसकी बिजली की खपत कितनी है. उसे खपत का रियल टाइम डेटा मिलता है.इन मीटरों से डिस्कॉम कंपनियों को भी फायदा है और उन्हें बिजली सप्लाई का पूरा भुगतान मिल पाता है. रेवेन्यू के लिहाज से ये मीटर फायदेमंद हैं. इन मीटरों से बिजली चोरी भी रुकती है.
स्मार्ट बिजली मीटर चोरी कैसे रोकता है?
पुराने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मीटर आसानी से टैम्पर हो जाते थे. लोग मैग्नेट लगाकर, बाईपास करके या न्यूट्रल वायर काटकर मीटर को धीमा या बंद कर देते थे. स्मार्ट मीटर पूरी तरह डिजिटल और टैम्पर-प्रूफ हैं. इनमें एडवांस्ड सेंसर लगे होते हैं जो मैग्नेटिक टैम्पर, कवर ओपन, न्यूट्रल डिस्कनेक्ट, रिवर्स करंट या असामान्य खपत का तुरंत पता लगाते हैं. यह मीटर घटना रिकॉर्ड करता है और रियल-टाइम में डिस्कॉम के सेंटर को अलर्ट भेजता है. जरूरत पड़ने पर रिमोट से कनेक्शन डिस्कनेक्ट भी किया जा सकता है. इससे चोरी लगभग असंभव हो जाती है.
प्रीपेड डिजिटल स्मार्ट मीटर का पूरा मैकेनिज्म क्या है?
स्मार्ट मीटर में माइक्रोकंट्रोलर, करंट और वोल्टेज सेंसर, रियल-टाइम क्लॉक और कम्युनिकेशन मॉड्यूल (RF/GSM/PLC) होते हैं. यह हर 15-30 मिनट में खपत का डेटा रिकॉर्ड करता है और AMI (Advanced Metering Infrastructure) के जरिए हेड-एंड सिस्टम को भेजता है. यह न सिर्फ यूनिट गिनता है बल्कि पावर फैक्टर, वोल्टेज फ्लक्चुएशन, पीक लोड आदि भी मॉनिटर करता है. एन्क्रिप्टेड डेटा होने से हैकिंग मुश्किल है.
क्या इन प्रीपेड मीटरों का बिल ज्यादा आता है, जैसा सूचनाएं आ रही हैं?
नहीं ऐसा नहीं है. इसमें भी उतना ही बिल आता है. यह साइकोलॉजिकल है कि प्रीपेड में पहले पैसा जमा करके फिर बिजली इस्तेमाल करते हैं तो बिल खत्म होता दिखता है.
इसके फायदे क्या हैं?
इन मीटरों से सटीक बिलिंग, अनुमानित बिल खत्म, विवाद कम होता है. ये रियल-टाइम मॉनिटरिंग के साथ ऐप या डिस्प्ले पर देख सकेंगे कि कौन-सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है, बिल कंट्रोल में रहेगा. इन मीटरों के लगने से पूरा सिस्टम अपडेट होगा. चोरी रुकने से बिजली की उपलब्धता और गुणवत्ता बढ़ेगी, कम लोडशेडिंग होगी. प्रीपेड ऑप्शन में रिचार्ज जैसे मोबाइल, लो-बैलेंस अलर्ट की भी सुविधा है. लंबे समय में बिल में बचत और पारदर्शिता भी है.
डॉ. भारत भूषण कहते हैं कि स्मार्ट मीटर सिर्फ मीटर नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन का स्मार्ट टूल है. UP में इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हो रहा है, जो AT&C घाटे को कम कर बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाएगा.

