Tuesday, May 26, 2026
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भारत ने क्यों शुरू किया था पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना? BPCL के पूर्व चेयरमैन ने बताई वजह


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भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का फैसला सिर्फ पर्यावरण बचाने के लिए नहीं लिया गया था. इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी चिंता थी, जो हर बार कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर सामने आ जाती है. अब बीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन ने इसकी असली वजह खुलकर बताई है. सरकार कई सालों से तेल पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार नई रणनीति पर काम कर रही है. इथेनॉल मिश्रण से लेकर सौर, पवन और हाइड्रोजन तक, पूरा फोकस एक ऐसे भारत पर है जो भविष्य में विदेशी तेल के झटकों से कम प्रभावित हो.

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गोपालन ने वैश्विक संकटों के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए तेल कंपनियों की तारीफ भी की.

नई दिल्ली. भारत में पेट्रोल की कीमतें जब भी बढ़ती हैं, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी कच्चा तेल माना जाता है. लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकार कई सालों से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है. इसके पीछे सिर्फ प्रदूषण कम करने की सोच नहीं बल्कि भारत की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती छिपी हुई है. देश हर साल अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है और यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हलचल होते ही भारत पर भी दबाव बढ़ जाता है. अब भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी बीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णकुमार गोपालन ने इस पूरी रणनीति के पीछे की असली वजह को विस्तार से समझाया है.

कृष्णकुमार गोपालन के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है क्योंकि वैश्विक बाजार में तेल महंगा होते ही भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि सरकार ने काफी पहले ही इस खतरे को समझ लिया था और इसी वजह से पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया. उनके मुताबिक यह भारत की तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में पहला बड़ा कदम था. सरकार लगातार तेल कंपनियों के साथ मिलकर ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे विदेशी तेल पर दबाव धीरे धीरे घटाया जा सके.

अब रिन्यूएबल एनर्जी पर पूरा फोकस

पूर्व बीपीसीएल प्रमुख ने कहा कि इथेनॉल के बाद अब सरकार का सबसे बड़ा ध्यान रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर है. भारत तेजी से सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहा है. उन्होंने बताया कि भविष्य को देखते हुए हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स पर भी विचार किया जा रहा है. उनका कहना था कि दुनिया धीरे धीरे पारंपरिक ईंधन से साफ ऊर्जा की तरफ बढ़ रही है और भारत भी इसी बदलाव की तैयारी कर रहा है.

तेल कंपनियों ने संभाला दबाव

गोपालन ने वैश्विक संकटों के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए तेल कंपनियों की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर की कुछ समस्याओं को छोड़ दें तो देश में शायद ही कभी ईंधन की बड़ी कमी देखने को मिली है. उनके मुताबिक तेल कंपनियों ने सप्लाई मैनेजमेंट का काम काफी बेहतर तरीके से संभाला है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने लागत का बड़ा हिस्सा खुद उठाया है.

पेट्रोल और डीजल पर भारी अंडर रिकवरी

पूर्व बीपीसीएल चेयरमैन के अनुसार फिलहाल पेट्रोल पर करीब 13 से 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 38 रुपये प्रति लीटर की अंडर रिकवरी चल रही है. यानी कंपनियां जितनी लागत में ईंधन खरीद रही हैं, उतने दाम पर उसे बेच नहीं पा रहीं. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी दिख रही है. अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत सफल रहती है और तनाव कम होता है, तो भारत को बड़ी राहत मिल सकती है. इससे तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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