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India-Russia Joint Venture Weapon: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर हैं. भारत-रूस ज्वाइंट वेंचर में ब्रह्मोस, AK-203, सुखोई-30 MKI, T-90 टैंक और तलवार क्लास फ्रिगेट्स जैसे प्रमुख हथियार बन रहे हैं. ये हथियार जमीन, हवा और पानी तीनों जगह सक्षम हैं और भारतीय सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं.
India-Russia Joint Venture Weapon: रूस के राष्ट्रपति इस वक्त भारत दौरे पर हैं. रूस पारंपरिक रूप से भारत का खास दोस्त रहा है. ट्रंप के टैरिफ के बाद दोनों देशों के बीच संबंध इस वक्त अपने सबसे अच्छे स्तर पर हैं. इस मौके पर चलिए हम आपको भारतीय सेना के पास मौजूद उन 5 हथियारों के बारे में बताते हैं, जिनका निर्माण भारत और रूस दोनों ज्वाइंट वेंचर के तहत कर कर रहा है.

ब्रह्मोस मिसाइल: यह भारत-रूस ज्वाइंट प्रोडक्शन का सबसे सफल उदाहरण है. यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसे भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroyeniya ने मिलकर बनाया है. इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है.यह जमीन, हवा और पानी तीनों जगह से दागी जा सकती है. अब भारत इसे दूसरे देशों जैसे फिलीपींस को निर्यात भी कर रहा है.

AK-203 असॉल्ट राइफल्स: भारतीय सेना की इंसास (INSAS) राइफलों को बदलने के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का ज्वाइंट वेंचर है। उत्तर प्रदेश के अमेठी में इसकी फैक्ट्री लगाई गई है. यहां लाखों आधुनिक AK-203 राइफलों का निर्माण भारत में ही किया जा रहा है. यह सेना का मुख्य हथियार बन रही है.
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सुखोई-30 MKI: यह भारतीय वायुसेना (IAF) की रीढ़ की हड्डी है. यह एक मल्टी-रोल एयर सुपीरियरिटी फाइटर जेट है. इसे रूस के सुखोई कॉर्पोरेशन ने डिजाइन किया है लेकिन इसका निर्माण भारत में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) द्वारा लाइसेंस प्रोडक्शन के तहत किया जाता है. MKI का मतलब है- Modernizirovannyi Kommercheskiy Indiski (आधुनिक कमर्शियल इंडियन). इसमें कई इजरायली और फ्रांसीसी एवियोनिक्स भी लगाए गए हैं जो इसे रूस के मूल विमान से बेहतर बनाते हैं.

T-90 भीष्म टैंक: यह भारतीय सेना का मेन बैटल टैंक (MBT) है. शुरुआत में इसे रूस से खरीदा गया था लेकिन बाद में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत भारत में इसका निर्माण शुरू हुआ. यह टैंक चेन्नई के पास अवाडी हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में बनाए जाते हैं.

तलवार क्लास फ्रिगेट्स: नेवी के लिए यह स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का एक प्रोजेक्ट है. पहले कुछ जहाज रूस में बने थे. अब नए समझौतों के तहत, कुछ जहाज रूस में बन रहे हैं और कुछ का निर्माण भारत के गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ किया जा रहा है.

