एक किसान को भिंडी की खेती ने करोड़पति बना दिया। खेती में एक छोटे से बदलाव से किसान की सालाना कमाई 2 करोड़ रुपए है। खेती से होने वाले प्रॉफिट से उसने फाइनेंस करना भी शुरू किया है।
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इस किसान की सक्सेस ने गांव के दूसरे किसानों को भी इंस्पायर किया है। म्हारे देस की खेती में इस बार बात भरतपुर के ठेई गांव रहने वाले 37 साल के गोविंद सिंह की।
करोड़पति बने गोविंद सिंह के कारण अब इस गांव की 600 बीघा से ज्यादा जमीन में केवल भिंडी ही उगाई जाती है।
पढि़ए 12वीं पास किसान का कैसे शुरू हुआ ये सफर…
ये खेत गोविंद सिंह का है। यहां 50 बीघा में भिंडी की बुवाई की जा रही है।
20 साल पहले आया था भिंडी उगाने का आइडिया
गोविंद सिंह ने बताया कि इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। उत्तरप्रदेश से उनके मामा आए हुए थे। उन्होंने पिता रणवीर सिंह से भिंडी की खेती करने के लिए खेत किराया पर देने के लिए बात कही।
उस समय हमारे खेत पर गेहूं, बाजरा और तिल की खेती होती थी। उन्होंने 12 बीघा जमीन10 हजार प्रति बीघा के हिसाब से रेंट पर ली।
भिंडी की खेती से उन्होंने महज 6 महीने में 15 लाख का प्रॉफिट हासिल किया। इसी खेती से उन्होंने बाइक और नया ट्रैक्टर लिया, फिर खुद का मकान भी बना लिया।

भिंडी की खेती जून से लेकर नवंबर तक होती है। छह महीने के समय में लाखों का मुनाफा हो जाता है।
पहली बार में 12 बीघा पर की खेती
गोविंद सिंह ने बताया कि मामा को हुए मुनाफे के बाद साल 2005 में उनके पिता ने भी 12 बीघा जमीन पर भिंडी की बुवाई की।उन्हें भी करीब 15 लाख रुपए का मुनाफा हुआ।
गोविंद सिंह ने बताया कि उनके पास पुश्तैनी करीब 250 बीघा जमीन है। पारंपरिक खेती से इतना मुनाफा नहीं होता था। लेकिन, जब पता चला कि सब्जियां उगाकर इतना मुनाफा कमाया जा सकता है तो पूरे खेत में सब्जियां उगाने का फैसला लिया।

गोविंद सिंह ने गांव के कई किसानों को मिट्टी का बेड बनाकर खेती करना सिखाया।
गोविंद सिंह का मुनाफा देख, गांव के लोगों ने शुरू की खेती
भिंडी की फसल से ज्यादा मुनाफ की बात गांव में चर्चा का विषय बनने लगी। स्थानीय किसानों को पता चला कि वे इतना मुनाफा कमा सकते है तो गांव के कुछ किसानों ने भिंडी की खेती शुरू की।
सिंह ने बताया कि गांव के कई किसानों ने उनके खेत पर आकर भिंडी की खेती करना का तरीका सीखा और इसे अपने खेत में आजमाया। गांव के किसानों को भी इससे काफी मुनाफा होने लगा।
गांव में भिंडी की पैदावार इतनी होने लगी कि भरतपुर मंडी में इसकी डिमांड बढ़ने लगी। आज गांव में करीब 250 किसानों की 600 बीघा जमीन पर भिंडी की फसल हो रही है। इससे गांव के कई किसान करोड़पति और लखपति बन गए।

इस गांव से भिंडी भरतपुर और जयपुर की मंडी के अलावा दिल्ली और यूपी की मंडी में भी बेची जाती है।
सब्जियां उगाकर कमा रहे है साल के 2 करोड़
गोविंद सिंह ने बताया कि उनके परिवार के पास ढाई सौ बीघा जमीन है। इसमें 100 बीघा में आलू, 50 में भिंडी और 100 बीघा में दूसरी सब्जियां (बैंगन, गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर) की बुवाई की जा रही है।
100 बीघा आलू की खेती में लगभग 60 लाख का मुनाफ हो जाता है। जबकि भिंडी बेचकर वे साल का 55 लाख का मुनाफा कमा रहे है।
इसके अलावा 100 बीघा में होने वाली दूसरी सब्जियों से वे साल का 1 करोड़ कमा रहे है। उन्होंने बताया कि ये सारा मुनाफा सब्जियों के भाव, सप्लाई आदि पर रहता है।
उन्होंने बताया कि कोई भी किसान भिंडी को स्टोर नहीं करता है। आज गांव की भिंडी को खेतों से तोड़कर सीधे जयपुर, दिल्ली, आगरा, मथुरा और आगरा की मंडियों में सप्लाई किया जा रहा है।

कमाई से फाइनेंस कंपनी खोली
गोविंद सिंह ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक ही पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने खेती करना शुरू कर दिया। खेती से जो मुनाफा हुआ उसका इंवेस्टमेंट फाइनेंस कंपनी में किया। वे शर्तों के अनुसार 1 लाख रुपए का लोन देते है। उनकी इस कंपनी से भी करीब 100 लोग जुड़े हुए हैं।

तुड़ाई के लिए नहीं मिलते मजदूर
गांव के किसानों का कहना है कि भिंडी के अलावा किसान और भी खेती करते हैं, लेकिन सभी तरह के खेती के मुकाबले भिंडी ज्यादा मुनाफा देती है। भिंडी की खेती में सबसे बड़ी समस्या मजदूरी की आती है।
भिंडी की तुड़ाई के लिए मजदूर नहीं मिलते हैं। क्योंकि भिंडी को तोड़ते समय शरीर में खुजली होने का खतरा होता है। करीब 1 बीघा में भिंडी की तुड़ाई के लिए 5 मजदूरों की जरूरत होती है।


एक आइडिया ने बदली गांव की किस्मत, पलायन रुका
भिंडी की खेती से गांव के जो लोग मजदूरी करने के लिए लिए शहर जाते थे। उन्हें अब बाहर नहीं जाना पड़ता। जो किसान ब्याज पर पैसे लेते थे उन्हें अब इतनी आमदनी होने लगी कि वह अब खुद ही आत्मनिर्भर हो गए हैं। किसान भिंडी की फसल के बाद गेहूं की फसल भी उगाते हैं। इससे उनकी इनकम भी बढ़ रही है।

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