Saturday, April 11, 2026
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मंडी में सील तोड़कर बेच दिया लाल आलू!: व्यापारी का दावा उन्होंने नहीं तोड़ा; जांच में जुटा खाद्य सुरक्षा विभाग – Gorakhpur News


29 सितंबर को खाद्य सुरक्षा विभाग ने दो ट्रक आलू सीज कर दिया था। उसी में से एक ट्रक आलू का सील तोड़कर बेचने की बात सामने आयी है।

गोरखपुर स्थित महेवा मंडी में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से सील किए गए आलू को बेचने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि एक व्यापारी ने सील तोड़कर आलू बेच दिया। जब बात लीक हुई तो जल्दी-जल्दी उसमें दूसरा आलू रखवा दिया। इस सूचना पर सोमवार को खाद्य सुरक्

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यदि सील तोड़ने की पुष्टि हो जाएगी तो व्यापारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दोपहर में किसी ने इस बात की सूचना दी कि आलू मंडी में जिन दो ट्रकों पर लदे आलू को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने तोड़ा है, उनमे से एक का सील तोड़कर आलू बेच दिया गया है। टीम जब पहुंची तो दुकान नंबर 20 के सामने सील किया गया माल यथावत नजर आया। जबकि दूसरी दुकान के सामने सील टूटी मिली। टीम के सदस्यों ने भी प्रथम दृष्टया यही माना है कि सील तोड़ा गया है। लेकिन व्यापारी ने सहायक आयुक्त से बात का दावा किया है कि सील पता नहीं कैसे टूट गई। अब दो दिन और इस मामले की जांच होगी।

दो ट्रकों पर 500 क्विंटल आलू बाहर से लाया गया था।

बाजार में बिक रहा केमिकल मिला आलू

बाजार में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक आलू बिक रहा है। खतरनाक केमिकल मिलाकर आलू को लाल और चमकदार बनाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रविवार को महेवा स्थित आलू मंडी में छापा मारकर दो ट्रक आलू जब्त कर लिया था। यह आलू तमिलनाडु के वेल्लौर और उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से मंगाया गया था। टीम ने ट्रकों पर लदे आलू की जांच की तो प्रथम दृष्टया उसमें केमिकल मिला पाया गया। टीम ने दोनों ट्रकों के माल जब्त कर लिए। दोनों ट्रकों पर मिलाकर 500 क्विंटल से अधिक लाल आलू लदा था। टीम ने वहां से सैंपल लिया है। जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में केमिकल मिलाने की पुष्टि हुई तो आलू को नष्ट करा दिया जाएगा।

अब जानिए कितना खतरनाक है यह आलू

बाजार में इस समय चटख लाल आलू खूब नजर आ रहे हैं। सब्जी विक्रेता से पूछेंगे तो वह बताएगा कि ऐसे ही आलू आ रहे हैं और बहुत अच्छे हैं। कीमत भी सामान्य आलू से अधिक है। लेकिन इसे खरीदते समय सावधान हो जाएं। यह कोई प्राकृतिक रंग नहीं है बल्कि केमिकल से रंगा गया है। वह केमिकल जिसका उपयोग पेंट में किया जाता है। छिलका उतारने पर भी यह सुरक्षित नहीं है। क्योंकि इसमें बने छोटे छिद्रों से केमिकल आलू के अंदर पहुंच जाता है। खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में मिलावट पायी गई है। इसका सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मंडी पहुंची थी तो हड़कंप मच गया था।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मंडी पहुंची थी तो हड़कंप मच गया था।

बलिया में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने इस मामले में जांच की थी। टीम की ओर से भेजे गए सैंपल में आलू में मिलावट पायी गई थी। इसमें आयरन आक्साइड या फेरिक ऑक्साइड मिलाने की पुष्टि हुई है। उसके बाद गोरखपुर में भी जांच की जा रही है। इसके लगातार इस्तेमाल से किडनी व लीवर भी फेल हो सकता है। हर ठेले पर नजर आते हैं लाल आलू गोरखपुर के हर बाजार में लगने वाले सब्जी के हर ठेले पर यह लाल आलू नजर आ जाएगा। सामान्य आलू से यह 5 से 10 रुपये प्रति किलो महंगा होता है। दुकानदार इसे ताजा और बढ़िया आलू कहकर बेचता है। लोगों को खरीदने के लिए प्रोत्साहित करता है। लेकिन यह आलू काफी खतरनाक होता है। ताजा आया आलू जब छिला जाता है तो इससे आंखों में जलन हो सकती है। पिछले करीब 6 महीने से ऐसे आलू बाजार में आ रहे हैं। कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से ला रहे सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डा. सुधीर कुमार सिंह का हना है कि कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी व कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से यह आलू गोरखपुर की मंडी में आ रहा है। कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने के बाद उसे केमिकल में रंगा जाता है। उसके बाद अलग-अलग जिलों के बाजार में भेज दिया जाता है। गोरखपुर में बड़ी सब्जी मंडी है, इसलिए यहां बड़ी मात्रा में आलू आ रहा है। आनलाइन मंगाने पर भी यही आलू सप्लाई किया जा रहा है।

टीम ने आलू का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया था।

टीम ने आलू का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया था।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने की प्रारंभिक जांच खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसकी प्रारंभिक जांच की है। पानी में आलू डालते ही पानी का रंग लाल हो गया। इसका सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मंडी भी गई थी। मंडी सचिव के साथ मिलकर थोक व्यापारियों से बात की गई थी। उन्हें यह आलू न मंगवाने के लिए जागरूक किया गया था। कुछ दिन तक आवक कम रही लेकिन इस समय फिर बढ़ गई। जानिए क्या होता है फेरिक ऑक्साइड

फेरिक ऑक्साइड या आयरन आक्साइड (Fe₂O₃, Fe₃O₄) का प्रयोग प्रायः पेंट, सिरेमिक और कॉस्मेटिक्स में होता है। लेकिन आलू या किसी भी ताज़ी सब्ज़ी पर कोटिंग के रूप में इसका प्रयोग अनुमन्य नहीं है। आयरन ऑक्साइड से लेपित आलू खाने पर शरीर में धातु (metal) जा सकती है, जिससे पेट की गड़बड़ी, उल्टी, मितली हो सकती है।

कुछ संवेदनशील व्यक्तियों में आयरन की अधिकता भी हो सकती है। लंबे समय तक सेवन करने से लीवर, गुर्दे और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। सब्ज़ियों पर आयरन ऑक्साइड या अन्य कृत्रिम रंगों का प्रयोग खाद्य मिलावट माना जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI, भारत) तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह प्रतिबंधित है। कई बार ऐसे रंगों का प्रयोग पुराने आलुओं को ताज़ा और चमकीला (लाल या पीला) दिखाने के लिए किया जाता है। यह रंग आलू के छिलके से भीतर तक पहुँच सकता है और नियमित सेवन पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। जिले की छोटी मंडियों में भी आता है आलू

थोक मंडी के व्यापारियों ने बताया कि इस तरह के आलू पिपराइच, सोनबरसा, चौरी चौरा, सहजनवा आदि मंडियों में भी आते हैं। छोटे व्यापारी वहां से यह आलू ले जाते हैं। उन मंडियों में भी कार्रवाई करनी होगी। इधर कुछ व्यापारियों ने पल्लेदारों को इस आलू की ढुलाई से स्किन से जुड़ी समस्या होने की शिकायत भी की थी।

जानिए क्या कहते हैं अधिकारी सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डा. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सील तोड़कर आलू बेचने की शिकायत हुई थी। टीम वहां गई थी। प्रथम दृष्टया कुछ कमियां नजर आयी हैं। व्यापारी का दावा है कि उसने सील नहीं तोड़ी। अभी जांच जारी रहेगी। जल्द ही सही स्थिति का पता लगा लिया जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।



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