नई दिल्ली: राजनीति के मैदान में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन जब जुबानी जंग साड़ियों के शोरूम और सरहद पार ढाका तक पहुंच जाए तो समझ लीजिए कि मामला बेहद दिलचस्प हो चुका है. पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों की तपिश अभी ठंडी भी नहीं हुई है कि बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बम फोड़ा जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी. महुआ मोइत्रा को भाभी संबोधित करते हुए दुबे ने न केवल उनके पुराने रिश्तों का हवाला दिया बल्कि सीधे बांग्लादेश के राजदूत से उनके लिए ढाका में जमदानी साड़ी का शोरूम खुलवाने की सिफारिश तक कर डाली.
यह महज एक तंज नहीं था बल्कि महुआ के उस प्रहार का पलटवार था जिसमें उन्होंने बीजेपी को दोमुंहा बताते हुए कहा था कि उन्हें बांग्लादेशी कहने वालों की पत्नियां ही ढाकाई साड़ियों की दीवानी हैं. साड़ियों के ताने-बाने में बुनी गई यह व्यक्तिगत और राजनीतिक छींटाकशी अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां मर्यादा और मजाक की लकीरें धुंधली पड़ती दिख रही हैं.
चुनावी हार और निशिकांत दुबे का तंज
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महुआ मोइत्रा को भाभी संबोधित करते हुए एक विवादित पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा कि चूंकि पिनाकी मिश्रा उनके पुराने दोस्त हैं इसलिए महुआ मोइत्रा उनकी भाभी हुईं. दुबे ने आगे तंज कसते हुए कहा कि बंगाल में टीएमसी की हार के बाद उन्होंने बांग्लादेश के नवनियुक्त राजदूत से आग्रह किया है कि महुआ के लिए ढाका में जमदानी साड़ी का शोरूम या बुनकर केंद्र खुलवा दिया जाए.
यह कटाक्ष महुआ मोइत्रा के उस ट्वीट के जवाब में आया जिसमें उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी के सांसद हमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहते हैं जबकि उनकी पत्नी बंगाल अभियान के दौरान लोगों से असली ढाकाई जमदानी साड़ियां खरीदने की जगह पूछती हैं.
साड़ी, सरहद और सियासत
इस विवाद के केंद्र में पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे हैं. बीजेपी लगातार टीएमसी पर तुष्टीकरण और घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है. निशिकांत दुबे का महुआ मोइत्रा को ढाका भेजने का सुझाव उसी बाहरी बनाम घुसपैठिया नैरेटिव का विस्तार है जिसे बीजेपी चुनाव के दौरान भुनाती रही है.
1. सांस्कृतिक प्रहार: जमदानी साड़ी बंगाल की साझा संस्कृति का हिस्सा है लेकिन इसे ढाका (बांग्लादेश) से जोड़कर दुबे ने महुआ की निष्ठा और उनकी राजनीति पर सवाल उठाने की कोशिश की है.
2. व्यक्तिगत राजनीति: पिनाकी मिश्रा का नाम लेकर महुआ को भाभी कहना राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत स्तर पर ले जाने का संकेत है.
3. हार का नैरेटिव: टीएमसी के चुनाव हारते ही इस तरह के बयान यह दर्शाते हैं कि बीजेपी अब विपक्ष को राज्य की सीमाओं से बाहर के मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है.
सवाल-जवाब
1. निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा को बांग्लादेश भेजने की बात क्यों कही?
निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा के उस ट्वीट पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने बीजेपी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था. दुबे ने टीएमसी की चुनावी हार का हवाला देते हुए तंज कसा कि अब उनके लिए ढाका में साड़ियों का व्यवसाय शुरू करना ही बेहतर विकल्प होगा.
2. इस विवाद में ‘जमदानी साड़ी’ का जिक्र क्यों हो रहा है?
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि बीजेपी नेता टीएमसी को ‘बांग्लादेशी’ कहते हैं, लेकिन उनकी पत्नियां ढाकाई जमदानी साड़ियों की तलाश करती हैं. इसी का जवाब देते हुए दुबे ने उन्हें ढाका में शोरूम खोलने की सलाह दे डाली.
3. ‘भाभी’ संबोधन के पीछे निशिकांत दुबे ने क्या तर्क दिया?
निशिकांत दुबे ने तर्क दिया कि चूंकि पिनाकी मिश्रा उनके पुराने मित्र हैं, इसलिए रिश्तों के नाते महुआ मोइत्रा उनकी ‘भाभी’ लगती हैं. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे एक तीखे व्यक्तिगत कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है.
4. इस बयान का राजनीतिक निहितार्थ क्या है?
यह बयान बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे टीएमसी नेताओं को बांग्लादेशी हितों से जुड़ा हुआ दिखाने की कोशिश करते हैं. चुनाव हारने के बाद इस तरह की बयानबाजी विपक्ष के मनोबल पर चोट करने के लिए की जा रही है.

