Saturday, April 11, 2026
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मां की लोरी पर लिखा वो गाना, 2 भारत रत्नों ने गाकर कर दिया अमर, सुनकर आंखें हो जाएंगी नम


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Dimple Kapadia Movie Rudaali Song: गुलजार जब फिल्म ‘रुदाली’ में काम कर रहे थे, तब संगीतकार ने उन्हें ऐसा गाना लिखनों को कहा जो उनकी मां की अनूठी लोरी में जाहिर उस गहरे दुख और खालीपन को भरे, जिसे वह बचपन में सुन…और पढ़ें

मां की लोरी पर लिखा वो गाना, 2 भारत रत्नों ने गाकर कर दिया अमरगाने को डिंपल कपाड़िया पर फिल्माया गया था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
नई दिल्ली: अगर आप हिंदी फिल्मों और गानों के दीवाने हैं, तो आपने लता मंगेशकर का गाया वो गाना जरूर सुना होगा, जिसे डिंपल कपाड़िया पर फिल्माया गया है. दरअसल, संगीतकार ने गुलजार से उस लोरी पर गाना लिखने को कहा था, जो बचपन में उनकी मां उन्हें सुनाती थीं. गाने के जरिये फिल्म ‘रुदाली’ और उसके किरदार शनिचरी की आत्मा जाहिर होती है, जिसे ठाकुर से प्यार होता है, लेकिन समाज और रिवाज उन्हें कभी एक नहीं होने देते. गाने की एक पंक्ति ‘तेरी ऊंची अटारी’ दिल को छूती है, जो प्रेमियों के बीच जाति और सामाजिक अंतर को बयां करती है. हम रुदाली के गाने ‘दिल हूम हूम की’ बात कर रहे हैं, जिसका संगीत भूपेन हजारिका ने तैयार किया था, जिसमें इस्तेमाल हुआ शब्द ‘हूम हूम’ उनकी मां की लोरी से लिया गया है.

भूपेन दा अपनी आत्मकथा ‘मई एति यायाबार’ (मैं एक खानाबदोश हूं) में बताते हैं कि उनका बचपन ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बीता, जहां उनकी मां शांतिप्रिया, उन्हें लोकगीत और लोरी सुनाती थीं. उनकी मां की आवाज ही उनके लिए संगीत की पहली पाठशाला थी. उनकी मां की एक लोरी बहुत अनोखी थी. वह लोरी के बीच में एक धुन गुनगुनाती थीं जिसमें ‘हूम हूम’ की आवाज आती थी. यह पारंपरिक लोरी नहीं थी, बल्कि यह उनके दिल की धड़कन या अंदर की भावनाओं की गूंज थी. यह धुन भूपेन के मन में गहराई तक उतर गई. उन्हें लगता था कि इस ‘हूम हूम’ की आवाज में एक अजीब सा खालीपन और दर्द था, जो किसी भी शब्द से ज्यादा ताकतवर था.

मां की सुनाई लोरी आई याद
कई सालों बाद जब भूपेन हजारिका निर्देशक कल्पना लाजमी की फिल्म ‘रुदाली’ के लिए संगीत बना रहे थे, तो उन्हें ऐसे गाने की जरूरत थी जो अकेलेपन और दर्द को जाहिर कर सके. फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला के बारे में थी जो दुख और वेदना को महसूस तो करती है, लेकिन उसे शब्दों में बयां नहीं कर पाती. इसी दौरान उन्हें अपनी मां की वही ‘हूम हूम’ वाली लोरी याद आई.

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भूपेन हजारिका एक कवि, संगीतकार और गायक थे. (फोटो साभार: IANS)

खालीपन को भरने के लिए लिखा गाना
भूपेन दा ने तुरंत गुलजार को बुलाया और उनसे कहा कि वह इस धुन पर कुछ ऐसा लिखें जो उस खालीपन को भर सके. गुलजार ने भूपेन की भावनाओं को समझा और गीत लिखा- ‘दिल हूम हूम करे, घबराए.’ जब भूपेन हजारिका ने यह गाना गाया, तो उन्होंने सिर्फ शब्दों को नहीं गाया, बल्कि अपनी मां की लोरी की उस संवेदना को आवाज दी. यह गाना एक कालजयी रचना बन गया, जिसने लाखों दिलों को छुआ और आज भी लोगों को रुला देता है. इसे दो भारत रत्नों लता मंगेशकर और भूपेन हजारिका ने गाया है. भूपेन दा एक गीतकार, कवि, फिल्म निर्माता और साहित्यकार थे. उनके असमिया, हिंदी और अन्य भाषाओं के गीत सामाजिक मुद्दों, मानवीय भावनाओं और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक बन गए.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल… और पढ़ें

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