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Mohammed Rafi Vs Kishore Kumar : बॉलीवुड के दो लीजेंड प्लेबैक सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के गानों का क्रेज आज भी कम नहीं हुआ है. किशोर कुमार के दौर में भी रफी साहब ने कई यादगार गाने गाए. यहां तक कि 1977 में उन्हें ‘क्या हुआ तेरा वादा’ के लिए नेशनल और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. मोहम्मद रफी और किशोर दा ने कई गाने मिलकर भी गाए. एक बार तो मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार के साथ मिलकर गाने की रिकॉर्डिंग की. घर लौटे तो देखा गाने की फीस बहुत ज्यादा मिल गई है. वो प्रोड्यूसर पर खूब नाराज हुए. इसके बाद उन्होंने जो किया, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा……
70 के दशक में लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने मिलकर कई बार साथ में रिकॉर्डिंग की. किशोर दा भी उनका बहुत सम्मान करते थे. वैसे तो रफी साहब हमेशा शांत रहते थे. बहुत ही सौम्य स्वभाव के थे. बहुत कम बोलते थे. पंजाबी में बात किया करते थे. एक बार ज्याद फीस मिल जाने पर वो प्रोड्यूसर से नाराज हो गए थे. इस पर भी रफी साहब के दिल का बोझ कम नहीं हुआ. ये प्रोड्यूसर कोई और नहीं बल्कि सुपर स्टार जीतेंद्र का है. जीतेंद्र ने 1980 के भाई के एक फिल्म प्रोड्यूस की थी. किशोर दा और रफी साहब ने एक गाना साथ में रिकॉर्ड किया था. रफी साहब ने ज्यादा पैसे मिलने पर क्या किया, आइये जानते हैं……..

पूरा किस्सा जीतेंद्र-ऋषि कपूर स्टारर फिल्म ‘दीदार-ए-यार’ से जुड़ा हुआ है जो कि 22 अक्टूबर 1982 को रिलीज हुई थी. फिल्म इस्लामिक रीति-रिवाजों पर बेस्ड थी. ‘दीदार-ए-यार’ को एचएस रवैल ने डायरेक्ट किया था जो कि राहुल रवैल के पिता थे. फिल्म को जीतेंद्र के भाई प्रसन्न कपूर ने प्रोड्यूस किया था. यह फिल्म करीब 5 साल में बनकर तैयार हो पाई थी.

वो गाना जिसे मोहम्मद रफी-किशोर कुमार ने मिलकर गाया था, उसके बोल थे : मेरे दिलदार का बाकपन, अल्लाह अल्लाह. गाना ऋषि कपूर-जीतेंद्र पर फिल्माया गया था. किशोर कुमार ने जीतेंद्र के लिए प्लेबैक किया था जबकि मोहम्मद रफी ने ऋषि कपूर को अपनी आवाज दी थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था.
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सुपर स्टार जीतेंद्र ने पूरा किस्सा बताया था. उन्होंने कहा था, ‘किस्सा ये है कि मेरी फिल्म का पहला गाना रिकॉर्ड हुआ. वो गाना रफी साहब ने गाया था. मैं 70 के दशक की बात कर रहा हूं. उस गाने के रफी साहब को 4000 रुपये दिए गए थे. पिक्चर बनते-बनते चार-पांच साल लग गए. ऋषि कपूर और मैं उस फिल्म में थे. लास्ट गाना किशोर कुमार-मोहम्मद रफी ने गाया था. गाने की रिकॉर्डिंग खत्म हुई तो प्रोडक्शन मैंनेजर मुझसे पूछने आया कि रफी साहब को कितने पैसे देना है. मैंने कहा कि जो किशोर दा को दिए हैं, वही रफी साहब को दे दो. वो बोले कि किशोर दा को तो 20 हजार रुपये दिए गए हैं. मैंने कहा कि उन्हें भी 20 हजार रुपये दे दो.’

जीतेंद्र ने आगे बताया, ‘रिकॉर्डिंग खत्म हुई तो रफी साहब के ब्रदर इन लॉ मेरे घर पर आए और बोले कि रफी साहब बहुत नाराज हैं. मैंने कहा कि क्या हो गया? मैंने ऐसा क्या किया? उस जमाने में मोबाइल तो नहीं थे. फोन लगाया तो वो मुझे डांटने लगे. वो पंजाबी में बात करते थे. बोले – जीते बहुत पैसे आ गए हैं तेरे पास. मैंने कहा कि क्या हो गया. उन्होंने 4 हजार रुपये रखे और 16 हजार रुपये लौटा दिए. आज के जमाने में आप सोच सकते हैं? ऐसा नेक बंदा, ऐसा नेक इंसान, जितनी मैं उनकी तारीफ करूं कम है.’

मोहम्मद रफी का किस्सा जितना दिल को छू लेने वाला है, इस फिल्म की किस्मत उतनी ही खराब रही. जीतेंद्र और उनके भाई ने यह फिल्म ‘तिरुपति पिक्चर्स एंटरप्राइजेज’ के बैनर तले बनाई थी. फिल्म को राहुल रवैल के पिता हरन सिंह रवैल ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में जीतेंद्र-रेखा, ऋषि कपूर-टीना मुनीम लीड रोल में थीं. यह मूवी बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई.

फिल्म की असफलता में बहुत बड़ा हाथ ‘निकाह’ मूवी ने निभाया. निकाह फिल्म ‘दीदार-ए-यार’ फिल्म से ठीक एक माह पहले 22 सितंबर 1982 को रिलीज हुई थी. दोनों ही फिल्में इस्लामिक रीति-रिवाजों पर बेस्ड थीं. ‘दीदार-ए-यार’ को बनने में करीब 5 साल का समय लगा. इससे मूवी की लागत बढ़ गई. बीआर चोपड़ा और उनकी टीम ने ऐसा खेल रचा कि जीतेंद्र की फिल्म ‘निकाह’ के बाद ही रिलीज हो पाई. ‘निकाह’ जहां ब्लॉकबस्टर साबित हुई, वहीं ‘दीदार-ए-यार’ डिजास्टर साबित हुई. फिल्म के फ्लॉप हो जाने से जीतेंद्र लगभग कंगाल हो गए. उन्हें साउथ की फिल्मों में काम करना पड़ा. साउथ की कई हिट फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने नुकसान की भरपाई की.

