Friday, April 10, 2026
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ये मोदी की लड़ाई है! ऐसा बोलने से पहले ये आंकड़े देख लें ट्रंप के बड़बोले मंत्री


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Crude Import from Russia : अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के आरोप लगाते हुए 50 फीसदी टैरिफ ठोका है. लेकिन, ट्रंप और उनके मंत्री चीन और रूस के आंकड़े नहीं देख रहे जो हमसे भी ज्‍यादा खरीदारी करते हैं.

ये मोदी की लड़ाई है! ऐसा बोलने से पहले ये आंकड़े देख लें ट्रंप के मंत्रीरूस से सबसे ज्‍यादा तेल यूरोपीय यूनियन ने खरीदा है.
नई दिल्‍ली. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाते समय बार-बार एक ही बात का हवाला दिया कि हम रूस से तेल खरीदते हैं और उसे पैसे देते हैं. इन पैसों का इस्‍तेमाल रूस ने यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में किया. ट्रंप के कुछ बड़बोले मंत्री तो इसे पीएम मोदी की लड़ाई बता रहे हैं, लेकिन इस तरह के खोखले बयान देने से पहले उन्‍हें आंकड़ों पर नजर दौड़ानी चाहिए. अगर ट्रंप और उनके मंत्रियों की नाराजगी इसी बात से है कि भारत ने रूस से तेल खरीदा तो जरा चीन और यूरोप के आंकड़े भी जरूर देखने चाहिए. इन आंकड़ों को देखने भर से ही पता चल जाता है कि अमेरिका की बातों में कोई दम नहीं है और सिर्फ खोखले दावे करके भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.

कई ग्‍लोबल फर्म ने इस बात के भी आंकड़े जारी कर दिए हैं कि आखिर रूसी तेल खरीदकर भारत को कितने पैसों की बचत हुई. पिछले दिनों ट्रंप ने कहा था कि भारत सस्‍ता तेल खरीदकर यूरोप सहित दूसरे देशों को महंगी कीमत पर बेचता है, लेकिन मुनाफे के आंकड़ों ने इन दावों की भी पोल खोल दी. ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसियों ने बताया है कि भारत को हर साल डिस्‍काउंट रेट पर रूस से ईंधन खरीदने पर महज 2.5 अरब डॉलर (करीब 22 हजार करोड़ रुपये) की बचत हुई है. जाहिर है कि इस सौदे से भारत ने बहुत ज्‍यादा नहीं कमाया है, जैसा कि पहले दावा किया जा रहा था. ट्रंप और उनके अन्य मंत्रियों के दूसरे दावे भी इसी तरह खोखले निकल रहे.

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रूस ने क्‍यों बेचा सस्‍ता तेल
यूक्रेन से युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और नाटो ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए. तब रूस ने अपने ईंधन को डिस्‍काउंट रेट पर बेचना शुरू कर दिया. दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदार भारत, चीन और यूरोप ने रूसी तेल खरीदा. इन तीनों ने रूस से कितना तेल खरीदा, इसका आंकड़ा फरवरी, 2022 से मार्च, 2025 यानी 3 साल का देखें तो पता चलता है कि किसने सबसे ज्‍यादा खरीदारी.

भारत ने रूस से कितना तेल खरीदा
भारत के आंकड़े देखें तो यह जरूर सामने आता है कि 2022 के बाद से हमने रूस से तेल खरीद 2 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी से भी ज्‍यादा कर दिया. इस दौरान भारत ने 112.5 अरब यूरो (करीब 10 लाख करोड़ रुपये) का तेल रूस से खरीदा है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, तेल के अलावा भारत ने कोयला और गैस भी रूस से खरीदा और कुल खरीदारी करीब 206 अरब यूरो की रही. पिछले वित्‍तवर्ष में भारत ने 8.74 टन रूसी तेल खरीदा जो करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये का पड़ा.

चीन ने रूस को कितने पैसे दिए
साल 2022 से 25 तक चीन ने कुल करीब 170 अरब यूरो (करीब 15 लाख करोड़ रुपये) का रूसी तेल खरीदा. सीआरईए की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने तेल के अलावा कोयला व गैस भी खरीदा और कुल रकम 235 अरब यूरो पहुंच गई. चीन का आयात रूस से तीन सालों में 50 फीसदी तक बढ़ गया. इस दौरान चीन की रोजाना खरीद 24 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई. जून, 2025 में चीन ने रूस से 47 फीसदी कच्‍चा तेल खरीदा, जो भारत से अधिक था.

यूरोप ने कितने पैसे का ईंधन खरीदा
वैसे तो यूरोप के हर देश का अलग आंकड़ा नहीं है, लेकिन यूरोपीय संघ की कुल खरीद देखें तो साल 2022 से 25 तक रूस से 314 अरब यूरो यानी करीब 27.63 लाख करोड़ रुपये का ईंधन खरीदा. यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध के बाद भले ही अपनी निर्भरता रूस पर कम की है, लेकिन आज भी वह बड़ी मात्रा में ईंधन रूस से ही खरीद रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने भी कहा था कि यूरोपीय संघ रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार है. बावजूद इसके अमेरिका ने सिर्फ भारत पर ही आरोप लगाते हुए टैरिफ ठोका है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

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