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Crude Import from Russia : अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के आरोप लगाते हुए 50 फीसदी टैरिफ ठोका है. लेकिन, ट्रंप और उनके मंत्री चीन और रूस के आंकड़े नहीं देख रहे जो हमसे भी ज्यादा खरीदारी करते हैं.
रूस से सबसे ज्यादा तेल यूरोपीय यूनियन ने खरीदा है. कई ग्लोबल फर्म ने इस बात के भी आंकड़े जारी कर दिए हैं कि आखिर रूसी तेल खरीदकर भारत को कितने पैसों की बचत हुई. पिछले दिनों ट्रंप ने कहा था कि भारत सस्ता तेल खरीदकर यूरोप सहित दूसरे देशों को महंगी कीमत पर बेचता है, लेकिन मुनाफे के आंकड़ों ने इन दावों की भी पोल खोल दी. ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों ने बताया है कि भारत को हर साल डिस्काउंट रेट पर रूस से ईंधन खरीदने पर महज 2.5 अरब डॉलर (करीब 22 हजार करोड़ रुपये) की बचत हुई है. जाहिर है कि इस सौदे से भारत ने बहुत ज्यादा नहीं कमाया है, जैसा कि पहले दावा किया जा रहा था. ट्रंप और उनके अन्य मंत्रियों के दूसरे दावे भी इसी तरह खोखले निकल रहे.
रूस ने क्यों बेचा सस्ता तेल
यूक्रेन से युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और नाटो ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए. तब रूस ने अपने ईंधन को डिस्काउंट रेट पर बेचना शुरू कर दिया. दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदार भारत, चीन और यूरोप ने रूसी तेल खरीदा. इन तीनों ने रूस से कितना तेल खरीदा, इसका आंकड़ा फरवरी, 2022 से मार्च, 2025 यानी 3 साल का देखें तो पता चलता है कि किसने सबसे ज्यादा खरीदारी.
भारत के आंकड़े देखें तो यह जरूर सामने आता है कि 2022 के बाद से हमने रूस से तेल खरीद 2 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी से भी ज्यादा कर दिया. इस दौरान भारत ने 112.5 अरब यूरो (करीब 10 लाख करोड़ रुपये) का तेल रूस से खरीदा है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, तेल के अलावा भारत ने कोयला और गैस भी रूस से खरीदा और कुल खरीदारी करीब 206 अरब यूरो की रही. पिछले वित्तवर्ष में भारत ने 8.74 टन रूसी तेल खरीदा जो करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये का पड़ा.
चीन ने रूस को कितने पैसे दिए
साल 2022 से 25 तक चीन ने कुल करीब 170 अरब यूरो (करीब 15 लाख करोड़ रुपये) का रूसी तेल खरीदा. सीआरईए की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने तेल के अलावा कोयला व गैस भी खरीदा और कुल रकम 235 अरब यूरो पहुंच गई. चीन का आयात रूस से तीन सालों में 50 फीसदी तक बढ़ गया. इस दौरान चीन की रोजाना खरीद 24 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई. जून, 2025 में चीन ने रूस से 47 फीसदी कच्चा तेल खरीदा, जो भारत से अधिक था.
यूरोप ने कितने पैसे का ईंधन खरीदा
वैसे तो यूरोप के हर देश का अलग आंकड़ा नहीं है, लेकिन यूरोपीय संघ की कुल खरीद देखें तो साल 2022 से 25 तक रूस से 314 अरब यूरो यानी करीब 27.63 लाख करोड़ रुपये का ईंधन खरीदा. यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध के बाद भले ही अपनी निर्भरता रूस पर कम की है, लेकिन आज भी वह बड़ी मात्रा में ईंधन रूस से ही खरीद रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने भी कहा था कि यूरोपीय संघ रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार है. बावजूद इसके अमेरिका ने सिर्फ भारत पर ही आरोप लगाते हुए टैरिफ ठोका है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

