Sunday, April 12, 2026
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रजाई-कंबल सुखाने की कर लीजिए तैयारी, इस बार पड़ेगी हड्डी गलाने वाली ठंड


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Cold Weather Forecast: मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. बारिश और गर्मी की तीव्रता लगातार बढ़ रही है. अब वेदर एक्‍सपर्ट ने विंटर सीजन को लेकर भी चेतावनी जारी की है. ला-नीना इफेक्‍ट की वजह से इस बार हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ सकती है.

ला-नीना इफेक्‍ट की वजह से इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है. (फाइल फोटो/AP)
Cold Weather Forecast: क्‍लाइमेट चेंज की वजह मौसम का मिजाज लगातार तल्‍ख होता जा रहा है. एवरेज तापमान में साल दर साल वृद्धि हो रही है. बारिश का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है. इस बार के मानूसन सीजन में देश के कई हिस्‍सों में जोरदार बारिश हुई. हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्‍तराखंड और पंजाब जैसे राज्‍यों में इसका असर देखा गया. अब सर्दियों के मौसम की बारी है. वेदर एक्‍सपर्ट विंटर सीजन के लिए अभी से ही अलर्ट करने लगे हैं. मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार कड़ाके की ठंड पड़ सकती है. उनकी मानें तो सर्दियों का मौसम औसत से ज्‍यादा ठंडा रह सकता है. इसकी वजह है ला-नीना इफेक्‍ट. ला-नीना के एक्टिव होने से तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है और इस बार अक्‍टूबर से दिसंबर के बीच इसके 71 फीसद तक एक्टिव रहने की संभावना है. इस वजह से इस बार का सर्दियों का मौसम सताने वाला हो सकता है.

दरअसल, मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस साल के अंत तक ला-नीना (La Niña) की वापसी हो सकती है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न बदलेंगे और भारत की सर्दियां सामान्य से अधिक ठंडी रह सकती हैं. अमेरिकी नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) ने 11 सितंबर को जारी पूर्वानुमान में कहा है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ला-नीना के एक्टिव होने की 71% संभावना है. हालांकि, दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच यह संभावना घटकर 54% तक रह जाएगी, लेकिन ला-नीना वॉच प्रभावी बनी रहेगी.

क्या है ला-नीना, भारत पर क्‍या असर?

ला-नीना, एल-नीनो–सदर्न ऑसीलेशन (ENSO) का ठंडा चरण है. इसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र का सतही तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है. इसका असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. भारत के लिए यह स्थिति प्रायः सर्दियों को सामान्य से ठंडा बना देती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमारे मॉडल अक्टूबर-दिसंबर के बीच ला-नीना विकसित होने की 50% से अधिक संभावना दिखा रहे हैं. भारत में ला-नीना अक्‍सर ठंडी सर्दियों से जुड़ा होता है. जलवायु परिवर्तन का तापमान बढ़ाने वाला प्रभाव इस ठंडक को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है, लेकिन सामान्य वर्षों की तुलना में सर्दियां अधिक ठंडी रहने की संभावना है. चूंकि मानसून के दौरान अच्छी बारिश ने पहले ही तापमान को काबू में रखा है, इसलिए 2025 कुल मिलाकर अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल नहीं होगा.’

समुद्री सतह से गहरा नाता

स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जी. पी. शर्मा ने कहा कि कम अवधि का ला-नीना एपिसोड इस साल संभव है. उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर पहले से ही सामान्य से ठंडा है, लेकिन अभी ला-नीना की परिभाषा वाले स्तर तक नहीं पहुंचा है. यदि समुद्र के सतह का तापमान -0.5°C से नीचे चला जाए और यह स्थिति कम से कम तीन लगातार तिमाहियों तक बनी रहे, तभी इसे आधिकारिक तौर पर ला-नीना घोषित किया जाएगा. उनके अनुसार, भले ही तापमान में यह गिरावट तकनीकी मानकों तक न पहुंचे, लेकिन मौजूदा ठंडा पड़ाव भी वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकता है. अमेरिका पहले ही सूखी सर्दियों (Dry Cold) की आशंका जता रहा है. भारत में प्रशांत महासागर का ठंडा होना आम तौर पर कड़ी सर्दियों और उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक बर्फबारी के साथ जुड़ा रहता है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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